राज्य रबी फसल सत्र के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजा बनाएं : कृषि मंत्री चौहान

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राज्य रबी फसल सत्र के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजा बनाएं : कृषि मंत्री चौहान

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  • Publish Date - September 28, 2026 / 02:55 PM IST,
    Updated On - September 28, 2026 / 02:55 PM IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को राज्य सरकारों से आगामी रबी फसल सत्र के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाने को कहा।

चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हाल में समाप्त हुए खरीफ सत्र में कुछ क्षेत्रों में सूखे और पानी की कमी की स्थिति को देखते हुए रबी की तैयारी की जानी चाहिए।

रबी (सर्दियों) के मौसम की तैयारियों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि रबी मौसम की बात करते समय खरीफ मौसम को भी ध्यान में रखना होगा। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप बदल रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं, हालांकि हर जगह फसल खराब नहीं हुई। कई स्थानों पर फसल अच्छी है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सूखे और पानी की कमी का खतरा है।

कृषि मंत्री ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में बारिश अच्छी हुई है, जबकि अन्य स्थानों पर यह औसत से कम रही है।

चौहान ने राज्य के अधिकारियों से अपील की कि वे संबंधित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और मिट्टी में नमी का आकलन करके रबी की वैज्ञानिक योजना बनाएं तथा सिंचाई के पानी की पहले से व्यवस्था करें।

उन्होंने कहा कि जल संसाधन सीमित हैं, इसलिए रणनीतिक तरीके से योजना बनाने और तैयारियों में देरी से बचने की जरूरत है।

उन्होंने बुवाई से पहले तथा उसके बाद सिंचाई की व्यवस्था पर भी जोर दिया।

कृषि मंत्री ने कहा कि फसल का चयन पानी की उपलब्धता के अनुरूप होना चाहिए और ऐसी अधिक पानी वाली किस्मों को प्राथमिकता देने से बचना चाहिए जो बाद में संकट का कारण बन सकती हैं।

उन्होंने राज्यों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसान बिना योजना के फसल की बुवाई न करें।

उन्होंने मिट्टी की नमी बनाए रखने, समय पर बुवाई करने और उपयुक्त किस्म के चयन पर भी जोर दिया।

चौहान ने कहा कि जहां पानी पर्याप्त है, वहां उपयुक्त किस्म का चयन किया जाए और जहां पानी की कमी है, वहां उसी के अनुरूप फसल और किस्म का चयन किया जाए।

कृषि मंत्री ने राज्यों से धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में मिट्टी में उपलब्ध नमी के आधार पर दलहन की बुवाई के लिए जिलेवार व्यापक रणनीति तैयार करने को कहा।

उन्होंने कहा कि उपयुक्त क्षेत्रों में उचित तकनीक का इस्तेमाल कर चना, मसूर और सरसों की खेती बढ़ाई जानी चाहिए।

चौहान ने कहा कि किसान स्वाभाविक रूप से अधिक लाभ देने वाली फसलों का रुख करेंगे और सरकार तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक सरकारी खरीद सहित खरीद व्यवस्था और व्यापक विपणन रणनीतियों को बेहतर नहीं बनाया जाता।

भाषा योगेश अजय

अजय