समावेशी, टिकाऊ और संतुलित वृद्धि के लिए ढांचागत सुधार आवश्यक: आरबीआई

समावेशी, टिकाऊ और संतुलित वृद्धि के लिए ढांचागत सुधार आवश्यक: आरबीआई

समावेशी, टिकाऊ और संतुलित वृद्धि के लिए ढांचागत सुधार आवश्यक: आरबीआई
Modified Date: November 29, 2022 / 08:37 pm IST
Published Date: May 27, 2022 1:16 pm IST

मुंबई, 27 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ढांचागत सुधारों का मजबूती से समर्थन करते हुए शुक्रवार को कहा कि समावेशी, टिकाऊ और संतुलित वृद्धि के लिए और वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बाद के प्रभावों से निपटने के लिए ये सुधार आवश्यक हैं।

आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की वृद्धि का मार्ग आपूर्ति पक्ष की बाधाओं को दूर करने, मुद्रास्फीति को कम करने तथा पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के लिए मौद्रिक नीति को समायोजित करने के जरिए निर्धारित किया जाएगा।

रिपोर्ट के ‘मूल्यांकन एवं संभावनाएं’ अध्याय में कहा गया, ‘‘भारत की मध्यावधि वृद्धि की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए ढांचागत सुधार टिकाऊ, संतुलित और समावेशी वृद्धि के लिए अहम हैं, विशेषकर वैश्विक महामारी के बाद के प्रभावों के मद्देनजर कर्मचारियों में कौशल विकसित करने में मदद देना और उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना सिखाना आवश्यक है।’’

इसमें कहा गया, ‘‘भूराजनीतिक संकटों का मुद्रास्फीति पर तुरंत असर पड़ा। तीन चौथाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर खतरा मंडरा रहा है। कच्चे माल, धातु और उर्वरक के अंतरराष्ट्रीय दामों में वृद्धि के कारण व्यापार और चालू खाता घाटे में अंतर और बढ़ गया।’’

आरबीआई ने कहा, ‘‘अनिश्चितताओं के बीच मुद्रास्फीति का रुख मुख्य रूप से बदलती भूराजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।’’ केंद्रीय बैंक ने कहा कि आपूर्ति पक्ष में नीतिगत हस्तक्षेप जैसे कि गेहूं निर्यात पर रोक, कपास के आयात पर सीमाशुल्क खत्म करना, वाहन ईंधनों पर उपकर घटना, कुछ इस्पाद उत्पादों पर निर्यात शुल्क बढ़ाना जैसे कदमों से कुछ संतुलन मिल सकेगा।

भाषा

मानसी

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