नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बाजार नियामक सेबी द्वारा कोटक महिंद्रा एएमसी, कोटक महिंद्रा ट्रस्टी कंपनी और उनके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को बरकरार रखते हुए कहा कि प्रतिभूति नियमों का पालन अनिवार्य है, चाहे निवेशकों को लाभ हुआ हो या हानि।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कोटक एएमसी, कोटक ट्रस्टी और छह अधिकारियों की अपील खारिज कर दी। इन अपीलों में प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सेबी के निष्कर्षों को सही ठहराया गया था।
मामला 2019 में कोटक एएमसी द्वारा एस्सेल समूह की कंपनियों के ऋण साधनों में निवेश की वापसी टालने से जुड़ा है। कंपनी ने योजनाओं की तय अवधि के बाद भी निवेशकों की राशि रोके रखी और न तो निवेशकों की सहमति ली और न ही नियमों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई।
न्यायालय ने कहा कि नियमों के तहत बंद अवधि वाली योजनाओं का भुगतान तय समय पर करना आवश्यक है, जब तक निवेशकों की पूर्व-सहमति लेकर अवधि नहीं बढ़ाई जाए। लेकिन इस मामले में ऐसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पीठ ने कोटक एएमसी की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसके फैसले ने निवेशकों को संभावित नुकसान से बचा लिया। इस पर अदालत ने कहा कि नियमों का उल्लंघन परिणाम से प्रभावित नहीं होता।
इसके साथ ही पीठ ने कहा कि कोटक एएमसी ने पर्याप्त जांच के बगैर निवेश किया और समय पर निवेशकों एवं सेबी को जानकारी भी नहीं दी।
शीर्ष अदालत ने कोटक एएमसी, कोटक ट्रस्टी और संबंधित अधिकारियों पर लगाए गए जुर्माने को बरकरार रखा।
इसके साथ न्यायालय ने कोटक एएमसी पर 30 लाख रुपये और कोटक ट्रस्टी पर 20 लाख रुपये का मुकदमा खर्च लगाया, जिसे दो महीने में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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