भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में स्वामीनाथन का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा: तोमर

भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में स्वामीनाथन का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा: तोमर

भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में स्वामीनाथन का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा: तोमर
Modified Date: September 28, 2023 / 07:33 pm IST
Published Date: September 28, 2023 7:33 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बृहस्पतिवार को मशहूर कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती पर जोर देकर भुखमरी के खिलाफ जीवन भर योद्धा की भूमिका निभाने वाले स्वामीनाथन का बृहस्पतिवार को यहां निधन हो गया।

वह 98 वर्ष के थे और उनकी तीन बेटियां हैं, जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन भी शामिल हैं।

तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास में स्वामीनाथन का असाधारण योगदान हमेशा याद किया जाएगा और लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

मंत्री ने कहा, स्वामीनाथन ने कृषि क्षेत्र की प्रगति में अपने योगदान के कारण न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में प्रतिष्ठा हासिल की है।

उन्होंने कहा, ‘‘उनका निधन पूरे देश और दुनिया के कृषि क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।’’

तोमर ने कहा कि स्वामीनाथन द्वारा कृषि के क्षेत्र में किये गये नवाचारों से किसानों को बहुत लाभ हुआ है। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता हासिल करने में स्वामीनाथन के योगदान को भारत कभी नहीं भूल सकता।

मंत्री ने कहा कि सरकार स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों के आधार पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा, स्वामीनाथन की निष्ठा और समर्पण से खेती को नया आयाम मिला है।

उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए बायोकॉन लिमिटेड की कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कहा, ‘‘डॉ एम एस स्वामीनाथन एक किंवदंती थे जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहेगी। उन्हें भारत की हरित क्रांति के महानतम वास्तुकारों में से एक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।’’

एग्रीमंडी डॉट लाइव रिसर्च के सह-संस्थापक और सीईओ उप्पल शाह ने कहा, “यह भारत के लिए एक दुखद दिन है। वह व्यक्ति जिसे हमारे भोजन, पोषण और भरण-पोषण का श्रेय जाता है, अब हमारे बीच नहीं है। भारत के नागरिक उनके आभारी हैं। हम उन्हें सलाम करते हैं।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

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