टाटा मोटर्स फाइनेंस, पीरामल एंटरप्राइजेज ने आरबीआई को एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस किए

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टाटा मोटर्स फाइनेंस, पीरामल एंटरप्राइजेज ने आरबीआई को एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस किए

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 10:24 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 10:24 PM IST

मुंबई, 10 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को बताया कि टाटा मोटर्स फाइनेंस और पीरामल एंटरप्राइजेज ने अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिए हैं।

यह कदम इन दोनों संस्थाओं का उनकी समूह कंपनियों के साथ हुए विलय के बाद उठाया गया है। टाटा मोटर्स फाइनेंस का टाटा कैपिटल के साथ विलय आठ मई, 2025 को पूरा हुआ था, जबकि पीरामल एंटरप्राइजेज का पीरामल फाइनेंस के साथ विलय सितंबर 2025 में हुआ था।

इन दोनों प्रमुख कंपनियों के अलावा छह अन्य गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने भी अपने लाइसेंस केंद्रीय बैंक को सौंप दिए हैं। इनमें एएआर श्याम इंडिया इन्वेस्टमेंट कंपनी, रामा इन्वेस्टमेंट कंपनी, श्री रामचंद्र एंटरप्राइजेज, श्री निर्माण, अंकिता प्रतिष्ठान और मयुका इन्वेस्टमेंट शामिल हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में आरबीआई ने उन नियमों के मसौदे पर जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिनमें कुछ विशेष एनबीएफसी को पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का प्रस्ताव है।

आरबीआई ने इन संशोधनों का मसौदा छह फरवरी को घोषित मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों को ‘भारतीय रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी पंजीकरण, छूट और पैमाना आधारित विनियमन ढांचा) संशोधन निर्देश, 2026’ का नाम दिया गया है।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ऐसी एनबीएफसी जो जनता से धन स्वीकार नहीं करतीं और जिनका ग्राहकों से कोई सीधा संपर्क नहीं है, उन्हें अब आरबीआई के पास पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। यह छूट केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेगी जिनकी संपत्ति का आकार 1,000 करोड़ रुपये से कम है। केंद्रीय बैंक ने इन्हें ‘टाइप-एक एनबीएफसी’ की श्रेणी में रखा है।

आरबीआई का मानना है कि इस तरह की कंपनियों में जोखिम कम होता है, इसलिए उन्हें नियमों में थोड़ी ढील दी जा सकती है। इन मसौदा निर्देशों पर सुझाव देने की अंतिम तिथि चार मार्च, 2026 तय की गई है।

भाषा सुमित रमण

रमण

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