नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) दिल्ली-एनसीआर में प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुल वित्तपोषण 2025 में नौ प्रतिशत बढ़कर 2.9 अरब डॉलर रहा। इसका मुख्य कारण अंतिम चरण के निवेश में भारी उछाल और वाहन प्रौद्योगिकी क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन है। स्टार्टअप, वित्तपोषण आदि के बारे में जानकारी देने वाला मंच ट्रैक्सन की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
हालांकि, कुल जुटाई गई पूंजी 2024 के 2.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 2.9 अरब डॉलर हो गई, लेकिन सौदों की संख्या में 34 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इससे वित्तपोषण दौर की संख्या पिछले वर्ष के 630 से घटकर 415 रह गई।
कुल वित्तपोषण में वृद्धि का मुख्य कारण अंतिम चरण के निवेश में तीव्र वृद्धि थी, जबकि काम शुरू करने के लिए वित्तपोषण और उसके बाद के चरण के वित्तपोषण पिछले वर्षों की तुलना में कम रहा।
अंतिम चरण के वित्तपोषण में 47 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो 2025 में 1.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके उलट, काम शुरू करने के चरण के वित्तपोषण (सीड फंडिंग) में 38 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 26 करोड़ डॉलर रहा, जबकि काम शुरू होने के बाद शुरुआती चरण के वित्तपोषण में 18 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 83.9 करोड़ डॉलर रहा।
वाहन प्रौद्योगिकी क्षेत्र इस मामले में अग्रणी रहा और इसने 1.4 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया जो 2024 की तुलना में 456 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है।
अन्य शीर्ष प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में खुदरा (65.1 करोड़ डॉलर) और एंटरप्राइज एप्लिकेशन (43 करोड़ डॉलर) शामिल हैं।
लगातार तीसरे वर्ष (2023-2025) दिल्ली-एनसीआर में कोई नया यूनिकॉर्न (एक अरब से अधिक मूल्यांकन वाला स्टार्टअप) नहीं बना।
हालांकि, आईपीओ गतिविधियों में 36 प्रतिशत की वृद्धि के साथ नकदी की स्थिति बेहतर होने का संकेत है। 2025 में कुल 19 कंपनियों ने आईपीओ जारी किए, जिनमें लेंसकार्ट, फिजिक्सवाला और पाइन लैब्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान रणनीतिक विलय और अधिग्रहण को गति मिली और 27 अधिग्रहण पूरे हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक हैं।
भाषा रमण अजय
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