नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी इस सप्ताह के अंत में सोशल मीडिया क्षेत्र की कंपनी मेटा की टीम से मिलेंगे और विभिन्न मुद्दों पर कई दौर की बातचीत के बाद हुई प्रगति का आकलन करेंगे। इन मुद्दों में हटाए जाने के बाद भी फर्जी और हानिकारक सामग्री का दोबारा सामने आना और बाल यौन शोषण सामग्री से निपटना शामिल है।
पिछले सप्ताह मेटा और सरकार के बीच लगातार तीन दिन तक बैठकें हुईं, जिनमें आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा वैश्विक टीम से तीखी पूछताछ की गई।
इसके बाद शुक्रवार को तकनीकी दौर की चर्चा हुई, जिसमें सोशल मीडिया कंपनी ने विस्तार से बताया कि वह अपने मंच पर डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री और बिना लेबल वाली कृत्रिम रूप से तैयार सामग्री को लेकर केंद्र की चिंताओं को कैसे दूर करने की योजना बना रही है। सरकार ने मेटा से खास कदम उठाने और उसके नतीजों की रिपोर्ट देने को कहा था।
सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि बातचीत के कई दौर के बाद प्रगति का आकलन करने के लिए अगली बैठक इस सप्ताह के अंत में होनी तय है।
शुक्रवार को चर्चा में शामिल प्रमुख मुद्दों में से एक एआई से बनी हानिकारक सामग्री को चिह्नित किए जाने और हटाए जाने के बाद भी उसका दोबारा दिखना, लगातार शेयर होना और वायरल होना था। सरकार ने मेटा से यह भी सवाल किया था कि बिना लेबल वाले एआई से बने वीडियो उसके मंच पर क्यों दिखते रहते हैं, जबकि आईटी नियमों के तहत बनावटी सामग्री की पहचान करना और लेबल लगाना अनिवार्य है।
सरकार ने मेटा से ‘कंटेंट मॉडरेशन’ में इंसानी निगरानी बढ़ाने को कहा है, जिससे भारतीय भाषाओं और स्थानीय बारीकियों की समझ को मजबूत किया जा सके।
भाषा पाण्डेय अजय
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