नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) भारत तेजी से दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हो रहे बदलाव का प्रमुख लाभार्थी बनकर उभर रहा है। उद्योग मंडल एसोचैम ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही।
एसोचैम की एक रिपोर्ट में कहा गया कि चीन अब भी दुनिया की सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्था है, लेकिन वैश्विक कंपनियां आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने के लिए केवल चीन पर निर्भर रहने के बजाय अन्य देशों में भी निवेश और उत्पादन बढ़ा रही हैं। इसके लिए वे ‘चाइना प्लस वन’, ‘नियरशोरिंग’ और ‘फ्रेंडशोरिंग’ जैसी रणनीतियां अपना रही हैं।
‘चाइना प्लस वन’ रणनीति का मतलब है कि कंपनियां चीन में अपना उत्पादन जारी रखते हुए जोखिम कम करने के लिए किसी अन्य देश में भी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करती हैं। ‘नियरशोरिंग’ का अर्थ है कि कंपनियां अपने उत्पादन या आपूर्ति गतिविधियों को दूर स्थित देशों से हटाकर अपने देश के नजदीकी देशों में स्थानांतरित करती हैं, ताकि लागत और आपूर्ति संबंधी जोखिम कम हो सकें।
‘फ्रेंडशोरिंग’ के तहत कंपनियां उत्पादन और आपूर्ति के लिए ऐसे देशों को प्राथमिकता देती हैं, जिनके साथ उनके राजनीतिक और आर्थिक संबंध बेहतर तथा भरोसेमंद हों।
रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के बाद भारत ने विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक औसत की तुलना में उल्लेखनीय सुधार किया है और वह दुनिया के उभरते हुए प्रमुख विनिर्माण देशों में शामिल हो गया है।
अध्ययन में कहा गया कि महामारी से पहले वर्ष 2016 से 2019 के दौरान भारत की औसत विनिर्माण वृद्धि दर 3.44 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2022 से 2025 के दौरान बढ़कर 4.15 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण क्षेत्र में यह सुधार सरकार के लगातार किए गए सुधारों और भारत में निवेशकों के बढ़ते भरोसे का परिणाम है।
भाषा योगेश अजय
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