यूएनडीपी, नाबार्ड आंकड़ों पर आधारित कृषि नवोन्मेषण के लिए करेंगे सहयोग

यूएनडीपी, नाबार्ड आंकड़ों पर आधारित कृषि नवोन्मेषण के लिए करेंगे सहयोग

यूएनडीपी, नाबार्ड आंकड़ों पर आधारित कृषि नवोन्मेषण के लिए करेंगे सहयोग
Modified Date: September 12, 2023 / 05:09 pm IST
Published Date: September 12, 2023 5:09 pm IST

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) यूएनडीपी इंडिया और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने छोटे किसानों की मदद के लिए कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में आंकड़ों पर आधारित नवोन्मेषण के विकास के लिए एक सहयोग समझौते पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत दोनों संगठन उत्पादों के विकास, प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और खेती से संबंधित नीतियों के निर्माण के लिए एक-दूसरे से आंकड़ों को साझा करेंगे। इन आंकड़ों की मदद से छोटी जोत वाले किसानों की जिंदगी को आसान बनाने और उनकी आजीविका को बेहतर करने की कोशिश की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भारत और नाबार्ड ने संयुक्त बयान में कहा कि इस साझेदारी का मकसद जलवायु-सक्षम कृषि में डाटा (डिक्रा) जैसे डिजिटल सार्वजनिक उत्पादों का विकास करना है। डिक्रा के जरिये जलवायु घटकों से निष्प्रभावी कृषि गतिविधियों के लिए भौगोलिक आंकड़ों तक खुली पहुंच मुहैया कराई जाती है।

यूएनडीपी और उसके सहयोगी संगठनों की पहल पर तैयार डिक्रा के तहत पहले से ही देशभर में पांच करोड़ हेक्टेयर खेतों के बारे में जलवायु-सक्षम सूचनाएं दी जा रही हैं।

बयान के मुताबिक, नाबार्ड डिक्रा मंच की देखरेख करने के साथ इसके प्रमुख भू-स्थानिक डेटा का इस्तेमाल नीतियां बनाने, शोध कार्य और विकास गतिविधियों में करेगा। इसमें नाबार्ड को यूएनडीपी की तरफ से तकनीकी सहयोग दिया जाएगा।

इस मौके पर नाबार्ड के चेयरमैन शाजी के वी ने कहा कि इस भागीदारी से दोनों ही संगठनों के लिए डेटा का लाभ उठाने से जुड़ी व्यापक संभावनाओं के द्वार खुलते हैं। इसे ग्रामीण भारत के कृषक समुदाय के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के तौर पर भी पेश किया जा सकता है।

यूएनडीपी इंडिया की उप स्थायी प्रतिनिधि इसाबेल चान ने कहा, ‘‘यह साझेदारी टिकाऊ कृषि तरीकों के निर्माण और छोटे किसानों खासकर महिलाओं की परेशानी को दूर कर आजीविका जुटाने में हमारे सहयोग को सशक्त करेगी।’’

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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