US Gives 30-Day Waiver for Russian Oil: रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को अनुमति देने वाले कौन होते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप? अपना फैसला लेने में सक्षम है इंडिया, अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान के बाद भड़के विपक्ष के नेता

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US Gives 30-Day Waiver for Russian Oil: रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को अनुमति देने वाले कौन होते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप? अपना फैसला लेने में सक्षम है इंडिया, अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान के बाद भड़के विपक्ष के नेता

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 10:06 AM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 10:24 AM IST

US Gives 30-Day Waiver for Russian Oil: रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को अनुमति देने वाले कौन होते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप? Image: IBC24 Customized

HIGHLIGHTS
  • भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी भी देश से 'इजाज़त' लेने की आवश्यकता नहीं
  • भारत की तेल आपूर्ति खतरे में
  • अमेरिका और भारत के बीच एक बड़ी ट्रेड डील "फिनिश लाइन" पर

नई दिल्ली: US Gives 30-Day Waiver for Russian Oil  इजराइल की ओर से खाड़ी देशों पर लगातार हो रहे हमले के बाद दुनिया भर में ईंधन के भारी संकट की संभावना जताई जा रही है। कल भी ईरान की ओर से दुनिया के सबसे पहले रिफाइनरी BAPCO पर हमले हुए थे, जहां से प्रतिदिन 3,80,000-4,00,000 बैरल तेल का प्रसंस्करण होता है। ऐसे में ये माना जा रहा है कि दुनिया भर में आगामी दिनों में पेट्रोल-डीजल के लिए तरसना पड़ सकता है। लेकिन इस बीच अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की अस्थाई छूट दे दी है। लेकिन अमेरिका के इस बयान के बाद भारतीय सियासत में बचाल मचा हुआ है और सवाल उठने लगे हैं कि अमेरिका कौन होता है जो भारत को छूट दे? भारत अपने आप में फैसला लेने में सक्षम है।

 

भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट

US Gives 30-Day Waiver for Russian Oil  दरअसल अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने गुरुवार को जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय सोच-समझकर लिया गया है और इसका उद्देश्य केवल पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल के लेन-देन को अधिकृत करना है, जिससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा। बेसेंट ने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, और उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह अस्थायी छूट ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अवरुद्ध करने के प्रयासों से पैदा हुए दबाव को कम करने में मदद करेगी। उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा उत्पादन के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का भी जिक्र किया और इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे का परिणाम बताया।

 

अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान के बाद भड़के कांग्रेस नेता

अमेरिका की ओर से जारी इस बयान के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने अपने अधिकारिक एक्स पर लिखा है कि BJP सरकार हर दिन भारत की आज़ादी और सॉवरेनिटी से समझौता कर रही है। भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अपने एनर्जी हितों की रक्षा के लिए “U.S. परमिशन” की ज़रूरत क्यों है? खासकर तब जब तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और होर्मुज स्ट्रेट बंद है? सुरजेवाला ने अपने एक्स पोस्ट पर ट्रंप की ओर से भारत को लेकर किए गए ऐलान की भी फेहरिस्त जारी की है

  • U.S. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीज़फ़ायर की घोषणा करेगा।
  • U.S. भारत को ईरान का तेल न खरीदने का निर्देश देगा।
  • U.S. भारत को रूसी तेल न खरीदने का निर्देश देगा और तब तक प्रतिबंध लगाएगा जब तक मोदी सरकार झुककर यह न कह दे कि वह रूसी तेल नहीं खरीदेगी।
  • क्या U.S. अब मोदी सरकार को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की परमिशन देगा?
  • U.S. सबसे पहले भारत के साथ ‘फ्रेमवर्क ट्रेड एग्रीमेंट’ की घोषणा करेगा। क्या दिल्ली में कोई सरकार है?

 

मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को लिया आड़े हाथों

वहीं, मनीष तिवारी ने लिखा है कि ‘30 दिन की छूट देना’- इस दिखावटी भाषा में नए साम्राज्य का घमंड झलकता है। क्या हम एक बनाना रिपब्लिक हैं कि हमें अपनी एनर्जी सिक्योरिटी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए US की इजाज़त की ज़रूरत है? वैसे तो बहुत ज़्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी बहरा कर देने वाली है। क्या उसे यह समझ नहीं आता कि सॉवरेनिटी का क्या मतलब है?

 

भारत को एक कॉलोनी की तरह देखता है अमेरिका: प्रियंका चतुर्वेदी

अमेरिकी सरकार के इस ऐलान पर राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा है कि हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां हमारी सरकार हमें स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी पर इंस्टाग्राम रील्स दिखाती है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उसने एक ट्रेड डील की आड़ में भारत के हितों को सरेंडर कर दिया है। जहां अब हमें अमेरिका से रूसी तेल खरीदने की परमिशन चाहिए। बस US ट्रेजरी सेक्रेटरी X की पोस्ट का टोन और तेवर पढ़िए, कोई भी समझ जाएगा कि उनके दिमाग में वे भारत को अपनी एक कॉलोनी के तौर पर देखने लगे हैं, न कि बराबर का पार्टनर। ये कितनी बड़ी गिरावट है।

रयसीना डायलॉग में क्या बोले US के डिप्टी सेक्रेटरी?

बता दें कि US के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने रयसीना डायलॉग 2026 को सबोधित करते हुए कहा है कि “इंडिया को समझना चाहिए कि हम इंडिया के साथ वही गलतियां नहीं करने जा रहे हैं जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं। फिर अगली बात जो हमें पता चलेगी, वह यह कि आप हमें कई कमर्शियल चीज़ों में हरा रहे हैं।” हम उस ट्रेड डील को लेकर उत्साहित हैं जो अब लगभग फिनिश लाइन पर है, और मुझे लगता है कि यह लगभग अनलिमिटेड पोटेंशियल को सच में अनलॉक करने का बेस हो सकता है। हम इंडिया और उनके इकोनॉमिक और बिजनेस के अवसर पर फोकस करने को लेकर बहुत उत्साहित हैं।

 

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अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट क्यों दी है?

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह 30 दिनों की "अस्थाई छूट" उन तेल टैंकरों के लेन-देन को पूरा करने के लिए है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं। इसका उद्देश्य खाड़ी देशों (ईरान-इजराइल युद्ध) के कारण पैदा हुए वैश्विक तेल दबाव को कम करना है।

विपक्ष इस फैसले का विरोध क्यों कर रहा है?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (सुरजेवाला, मनीष तिवारी, प्रियंका चतुर्वेदी) का कहना है कि भारत एक संप्रभु (Sovereign) राष्ट्र है। हमें अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका से "परमिशन" लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। वे इसे भारत की आजादी और कूटनीति की हार बता रहे हैं।

'बापको' (BAPCO) रिफाइनरी पर हमले का भारत पर क्या असर होगा?

बापको रिफाइनरी प्रतिदिन 4 लाख बैरल तेल प्रोसेस करती है और भारत इसका बड़ा खरीदार है। इस पर हमले से भारत में डीजल और जेट फ्यूल (हवाई ईंधन) की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे महंगाई बढ़ना तय है।

रायसीना डायलॉग 2026 में अमेरिका ने क्या चेतावनी दी?

अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी क्रिस्टोफर लैंडौ ने साफ कहा कि अमेरिका, भारत के साथ वैसी "उदारता" नहीं दिखाएगा जैसी उसने 20 साल पहले चीन के साथ दिखाई थी। वे भारत को एक व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी (Competitor) के रूप में देख रहे हैं।

क्या रूस से तेल खरीदना अब भारत के लिए मुश्किल होगा?

अमेरिका की यह 30 दिन की डेडलाइन संकेत देती है कि भविष्य में वह भारत पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बनाएगा और भारत को अमेरिकी तेल की ओर मोड़ने की कोशिश करेगा।