नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड ने कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज को सफल बोलीदाता चुने जाने की प्रक्रिया पर बुधवार को एक बार फिर सवाल उठाए।
वेदांता लिमिटेड की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत सिन्हा ने अपनी जवाबी दलील में कहा कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) से स्पष्टता आनी जरूरी है।
उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से, इस मामले में सीओसी ने पारदर्शिता और स्पष्ट प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।”
इसके साथ ही सिन्हा ने आरोप लगाया कि सीओसी ने अधिकतम मूल्य हासिल करने के लिए अपनाई गई अपनी ही प्रक्रिया को छोड़ दिया है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को चुने जाने के खिलाफ दायर वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाओं पर बुधवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की दो-सदस्यीय पीठ ने वेदांता, समाधान पेशेवर (आरपी), कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों को दो दिन के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।
मामले की सुनवाई के दौरान वेदांता के वकील ने कर्जदाताओं द्वारा अपनाए गए मूल्यांकन मानदंडों पर सवाल उठाया। कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी, जबकि वेदांता की 17,926 करोड़ रुपये की बोली को खारिज कर दिया गया था।
सिन्हा ने सीओसी द्वारा अपनाई गई मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल एक जरिया है और इसके आधार पर किसी बाध्यकारी समझौते का विकल्प नहीं तैयार किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि इस मामले में निर्धारित मानदंड सामूहिक थे लेकिन बाद में अचानक बदलाव किया गया, जबकि शुरुआत में निर्णय शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) और अग्रिम भुगतान जैसे पहलुओं पर आधारित होना था।
सिन्हा ने उच्चतम न्यायालय और एनसीएलएटी के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ‘व्यावसायिक सूझबूझ’ का इस्तेमाल ठोस आधार पर होना चाहिए और यह रिकॉर्ड में दिखना भी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर 76,000 करोड़ रुपये की दिवाला प्रक्रिया एक ही बैठक में पर्याप्त विचार-विमर्श के बगैर पूरी हो जाती है, तो इससे गलत संदेश जाता है। ऐसा नहीं हो सकता कि हर बात को ‘व्यावसायिक सूझबूझ’ कहकर सही ठहरा दिया जाए।”
उन्होंने दिवाला प्रक्रिया के दौरान मूल्यांकन लीक होने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी ठोस दस्तावेज या हलफनामे के बगैर इस तरह के गंभीर आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।
इससे पहले 24 मार्च को एनसीएलएटी ने वेदांता समूह की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 17 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि एनसीएलएटी ने कहा था कि अंतिम फैसला अपील के परिणाम पर निर्भर करेगा।
एनसीएलटी ने अपने आदेश में जेएएल के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की तरफ से लगाई गई बोली को मंजूरी दी थी।
वेदांता ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी थी लेकिन शीर्ष अदालत ने रोक देने से इनकार कर दिया। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जेएएल की निगरानी समिति कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से पहले न्यायाधिकरण की अनुमति ले।
अदाणी एंटरप्राइजेज ने जेएएल के लिए लगाई बोली में वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। अदाणी एंटरप्राइजेज को कर्जदाताओं के सर्वाधिक 89 प्रतिशत मत मिले थे।
जेपी समूह की प्रमुख कंपनी जेएएल को 57,185 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान में चूक के बाद जून, 2024 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया था।
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प्रेम रमण
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