कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद भारत में सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव: एसोचैम

Ads

कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद भारत में सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव: एसोचैम

  •  
  • Publish Date - April 22, 2026 / 09:47 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 09:47 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) उद्योग निकाय एसोचैम ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से उपभोग आधारित है और कच्चे तेल की कीमत 90-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद देश सालाना सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज कर सकता है।

निकाय ने कहा कि उच्च ऊर्जा लागत के प्रति भारत का लचीलापन पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है, क्योंकि देश ने तेल के गंभीर झटकों को सहन किया है और इसके बावजूद वृद्धि दर मजबूत बनी रही है।

एसोचैम ने अपने विश्लेषण के आधार पर कहा कि भारत ने आर्थिक वृद्धि की गति से समझौता किए बिना उच्च ऊर्जा कीमतों को प्रबंधित करने की अपनी क्षमता दिखाई है। इसमें कहा गया, ”2000-01 से 2025-26 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत ने कच्चे तेल की मध्यम से उच्च कीमतों के स्तर पर भी अपने कुछ सबसे मजबूत वृद्धि दर वाले वर्ष दर्ज किए हैं।”

एसोचैम के अनुसार 2022-23 में वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत थी, जबकि तेल की कीमतें (भारतीय बास्केट) 93 डॉलर प्रति बैरल (वार्षिक औसत) पर थीं। वहीं 2023-24 में तेल की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल रहने पर वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा, ”भारत की वृद्धि गाथा मुख्य रूप से इसके उपभोग क्षेत्र द्वारा संचालित है। यह कारखानों के विस्तार, अधिक श्रमिकों की नियुक्ति और उच्च आय स्तरों के माध्यम से आपूर्ति पक्ष को मजबूत करती है, जिससे वृद्धि का एक सकारात्मक चक्र बनता है और अर्थव्यवस्था का लचीलापन बढ़ता है।”

मिंडा ने कहा कि एसोचैम का मानना है कि मजबूत उपभोग, स्थिर निर्यात और बढ़ते पूंजी निवेश के समर्थन से 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय