(Credit Card/ Image Credit: Pexels)
Credit Card: आज के समय में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादातर लोगों की वॉलेट में दो-तीन कार्ड होना आम बात हो गई है। युवाओं के बीच यह इसलिए भी लोकप्रिय है क्योंकि यह तुरंत एडवांस फंड पाने का सरल तरीका देता है। HDFC, SBI और ICICI जैसे बड़े बैंक अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कस्टमर्स को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराते हैं। एप्लीकेशन प्रक्रिया आजकल डिजिटल और आसान हो गई है। आमतौर पर कार्ड की लिमिट ग्राहक की आय और क्रेडिट स्कोर के आधार पर तय की जाती है।
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह सवाल भी उठता है कि अगर कार्ड होल्डर की अचानक मौत हो जाए, तो बकाया रकम का क्या होगा? बैंक आमतौर पर मृतक की प्रॉपर्टी, पॉलिसी या निवेश से बकाया वसूलने की कोशिश करता है। लेकिन अगर ऐसी कोई संपत्ति न हो, तो परिवार पर कोई बोझ नहीं डाला जाता। क्रेडिट कार्ड का कर्ज सिर्फ कार्ड होल्डर की जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में कर्ज खत्म माना जाता है।
अगर बकाया रकम मृतक की संपत्ति से ज्यादा हो, तो बची हुई राशि को बैंक NPA यानी Non-Performing Asset के रूप में दर्ज करता है। यानी बैंक इसे अपने नुकसान में शामिल कर लेता है। इससे परिवार पर कोई वित्तीय दबाव नहीं पड़ता।
RBI ने लेंडर्स को निर्देश दिया है कि कर्ज वसूलने में धमकी या उत्पीड़न का सहारा न लें। कार्ड होल्डर के परिवार, दोस्तों या रेफरेंस को परेशान करना कानूनी रूप से गलत है। वहीं, FD-बैक्ड या सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड में बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट बेचकर बकाया वसूल सकते हैं।