खाद्य उत्पाद, ईंधन, विनिर्मित सामान के महंगा होने से अगस्त में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.92 प्रतिशत

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खाद्य उत्पाद, ईंधन, विनिर्मित सामान के महंगा होने से अगस्त में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.92 प्रतिशत

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  • Publish Date - September 14, 2026 / 03:48 PM IST,
    Updated On - September 14, 2026 / 03:48 PM IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) खाद्य उत्पादों, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण थोक मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई। जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत के स्तर पर थी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

अगस्त की मुद्रास्फीति दर 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) श्रृंखला में दूसरी सबसे अधिक है।

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हाल की तेजी डब्ल्यूपीआई और उत्पादक मूल्य सूचकांक (ओपीपीआई) पर दबाव बनाए रखेगी।

उत्पादक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 9.81 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.6 प्रतिशत थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को डब्ल्यूपीआई के आंकड़े जारी करते हुए कहा, ‘‘ खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, मूल धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं तथा रसायन और रासायनिक उत्पादों का विनिर्माण अगस्त, 2026 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति बढ़ने के प्रमुख कारण रहे।’’

अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 6.65 प्रतिशत थी। विनिर्मित वस्तुओं की मुद्रास्फीति बढ़कर 8.37 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो जुलाई में 8.29 प्रतिशत थी।

ईंधन और बिजली में थोक मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 20.05 प्रतिशत थी।

वित्त परामर्श कंपनी बार्कलेज ने एक शोध टिप्पणी में कहा कि ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति में तेजी खनिज तेल व प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम की थोक कीमतों में वृद्धि के कारण आई जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से हुई।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि लंबे समय से जारी पश्चिम एशिया संकट ने ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति में दो महीने से जारी गिरावट का रुख पलट दिया है और संकट का समाधान होने तक इसके ऊंचे स्तर पर बने रहने के आसार हैं।

पंत ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संकट का समाधान नहीं होने से (रूस-यूक्रेन संकट की तरह) निकट अवधि में वैश्विक अनिश्चितता बनी रहने के आसार हैं। इसके साथ ही कम बारिश और कमजोर मुद्रा निकट अवधि में मुद्रास्फीति को और बढ़ाएंगे।’’

रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि प्रतिकूल आधार प्रभाव के साथ-साथ चीनी जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सामान्य से अधिक क्रमिक वृद्धि के कारण सितंबर-अक्टूबर, 2026 में खाद्य मुद्रास्फीति के और बढ़ने की आशंका है। इससे त्योहारी मौसम के दौरान धारणा प्रभावित हो सकती है।

भाषा निहारिका अजय

अजय