पीलीभीत (उप्र), 14 सितंबर (भाषा) नेपाल के जंगलों से भटककर आए जंगली हाथियों ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के गांवों में जमकर उत्पात मचाया और खेतों में खड़ी धान एवं गन्ने की फसल को कुचल दिया।
सेहरामऊ उत्तरी इलाके में सक्रिय ये हाथी रात में जंगल से निकलकर खेतों में घुस आते हैं जिससे परेशान होकर किसानों ने वन विभाग से निगरानी बढ़ाने और फसल के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
पीलीभीत बाघ अभयारण्य के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) और उप निदेशक मनीष सिंह ने इलाके में हाथियों की मौजूदगी की पुष्टि की। उन्होंने अंदेशा जताया कि नेपाल में आई बाढ़ के बाद हाथियों के झुंड इस इलाके की ओर आ गए होंगे।
सिंह ने ‘पीटीआई—भाषा’ को बताया, ”हाथियों को इलाके से खदेड़ना हमारी पहली प्राथमिकता है। लगातार निगरानी के लिए रविवार से ही वन विभाग की एक टीम मौके पर तैनात है।”
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
सिंह ने कहा, ”फसल के नुकसान का पता लगाने के लिए सर्वे किया जाएगा और राजस्व विभाग रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को सरकार से मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।”
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार रात हाथियों का एक झुंड सेहरामऊ गांव के पास खेतों में घुस आया और फसलें रौंद दी।
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों ने सेहरामऊ के रहने वाले विजय बहादुर सिंह और ओम प्रकाश की लगभग एक एकड़ धान की फसल, दीनदयाल की तीन बीघा धान की फसल और धीरज की दो बीघा गन्ने की फसल नष्ट कर दी।
उन्होंने बताया कि शनिवार रात हाथी फिर उसी इलाके में लौटे और प्रह्लाद की लगभग पांच बीघा धान की फसल और श्रीराम की गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया।
ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने किसान चंद्रदेव की चार बीघा, धनराजी की तीन बीघा, शिवपूजन की पांच बीघा और तरकेसर की पांच बीघा गन्ने की फसल भी नष्ट कर दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के झुंड का सामना करने से किसानों की जान को खतरा हो सकता है और उन्हें चिंता है कि ये हाथी अब रिहायशी इलाकों में घुस सकते हैं, जिससे कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
किसानों का आरोप है कि हाथियों की आवाजाही की जानकारी होने के बावजूद वन विभाग ने उन्हें खेतों और आबादी वाले इलाकों में घुसने से रोकने के लिए प्रभावी गश्त और निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए।
किसानों ने मांग की है कि वन विभाग फसल को हुए नुकसान का सर्वे करे और मुआवजे की व्यवस्था करे।
भाषा सं. सलीम मनीषा रंजन
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