MLA Shakuntala Porte News: 'गुरूर में रहना बंद करें...जनता का श्राप बड़े-बड़े लोगों का गुरूर तोड़ देता है' देखते रह गए अधिकारी, जब विधायक शकुंतला पोर्ते ने दिखाए अपने तीखे तेवर / Image: IBC24
वाड्रफनगर: MLA Shakuntala Porte News ‘सरकारी काम है…सरकारी की तरह ही होगा’ ये बातें आपने अपने आस-पास के लोगों से कई बार सुनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी काम-काज में कई बार इतना समस लग जाता है कि लोग हलाकान हो जाते हैं। सरकारी काम-काज में देरी का बड़ा कारण दस्तावेजों की कमी या तो कर्मचारियों की लापरवाही होती है। ऐसे ही लापरवाह अफसरों पर प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का सख्त अंदाज देखने को मिला है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत देते हुए सीधे कहा कि गुरूर में रहना बंद करें और जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करें।
MLA Shakuntala Porte News दरअसल वाड्रफनगर में समाधान शिविर का आयोजन किया गया था, जिसके प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते भी शामिल हुईं थी। इस दौरान उन्होंने राजस्व अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी अपने गुरूर में रहना बंद करें और जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करें। विधायक ने मंच से साफ कहा कि “जनता का श्राप बड़े-बड़े लोगों का गुरूर तोड़ देता है”, इसलिए अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाएं और जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में इन दिनों सुशासन तिहार 2026 चल रहा है, जिसकी शुरुआत 1 मई से की गई है और ये 10 जून तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक और सांसद जनता के बीच पहुंच रहे हैं और उनकी समस्याओं का निराकरण मौके पर ही कर रहे हैं। खुद सीएम विष्णुदेव साय भी सुशासन तिहार के तहत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर जनता की समस्याएं सुन रहे हैं।
वहीं, कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।
आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे। गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं – कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर। जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा – “आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”