छत्तीसगढ़: बलौदाबाजार इस्पात संयंत्र में हादसे के बाद भट्टी बंद, खामियां पाई गईं

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छत्तीसगढ़: बलौदाबाजार इस्पात संयंत्र में हादसे के बाद भट्टी बंद, खामियां पाई गईं

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 12:58 PM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 12:58 PM IST

रायपुर, 23 जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ सरकार ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में एक इस्पात संयंत्र में विस्फोट के कारण छह मजदूरों की मौत के बाद संयंत्र की भट्टी (किल्न) नंबर-एक को सील कर दिया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

बृहस्पतिवार सुबह नौ बजकर 40 मिनट पर बकुलाही गांव स्थित ‘मेसर्स रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड’ में हुई इस घटना में पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल भी हो गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर की गई प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानदंडों के गंभीर उल्लंघन सामने आने के बाद कारखाना अधिनियम के तहत ‘किल्न’ नंबर-एक के संचालन और समस्त रखरखाव कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया।

विस्फोट किल्न नंबर-एक के ‘डस्ट-सेटलिंग’ चैंबर की दूसरी मंजिल पर रखरखाव कार्य के दौरान हुआ। अचानक हुए विस्फोट और 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली गर्म राख के बिखरने से छह मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के उप निदेशकों और अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने फैक्टरी का निरीक्षण किया। फैक्टरी प्रबंधन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दुर्घटना स्थल की ‘फोटोग्राफी’ और ‘वीडियोग्राफी’ भी कराई गई।

अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया गया था।

उन्होंने बताया कि ‘किल्न’ को बंद किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया। ‘डस्ट-सेटलिंग’ चैंबर का हाइड्रोलिक दरवाजा बंद नहीं किया गया, न ही उचित कार्य आदेश जारी किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा नियमित रखरखाव का अभाव रहा और श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण तथा ताप-रोधी ‘एप्रन’, सुरक्षा जूते और हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए।

अधिकारियों ने बताया कि किल्न नंबर-एक में निर्माण प्रक्रिया और रखरखाव कार्य ‘‘आसन्न खतरा’’ की स्थिति में पाए गए, जिसके परिणामस्वरूप कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत इसके संचालन और सभी रखरखाव कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा, जब तक फैक्टरी प्रबंधन सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध अवधि के दौरान कारखाने में कार्यरत सभी श्रमिकों को देय वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से किया जाएगा।

इस बीच, फैक्टरी प्रबंधन ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक मजदूर के परिवार को 20 लाख रुपये और प्रत्येक घायल मजदूर को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

इसके अलावा, मृतकों के परिवारों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम से कर्मचारी मुआवजा कोष के जरिए औसतन 10 लाख रुपये और आने वाले वर्षों में पेंशन लाभ के रूप में औसतन 15 लाख रुपये मिलेंगे। घायल मजदूरों को भी काम पर लौटने तक निगम के माध्यम से गुजारा भत्ता दिया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, जान गंवान वाले प्रत्येक मजदूर के परिवार को कुल मिलाकर लगभग 45 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।

भाषा संजीव मनीषा खारी

खारी