रायपुर, 11 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नयी तस्वीर देश के सामने प्रस्तुत की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब नयी पहचान की ओर अग्रसर है, यहां दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं चलाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में ‘डेरी मॉडल’ को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि गांवों में स्थायी आय के स्रोत विकसित किए जा सकें। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा डेरी केंद्रों, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
साय ने बताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए दो हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की दो बड़ी परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, जिनसे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में साल भर पानी उपलब्ध रहने से खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य फसलें भी उगा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारियों और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।
उन्होंने बताया कि बस्तर में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थ स्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है।
उन्होंने बताया कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक के माध्यम से विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध हो रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें सुगंधित चावल का प्रमुख योगदान रहा है। इससे किसानों, कारीगरों और उद्यमियों की आय में वृद्धि हो रही है।
भाषा
संजीव रवि कांत