Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,Daily Wage Employees Regularization|| Image- CG HC File
बिलासपुर: Contract Employee Latest News छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पेंशन से जुड़े एक अहम मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दैनिक वेतनभोगी के रूप में की गई सेवा, यदि बाद में नियमित हो गई है, तो उसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में जोड़ा जाएगा। इसी के साथ राज्य सरकार द्वारा दायर रिट अपील को खारिज कर दिया गया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है।
Contract Employee Latest News मामला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी बेमेतरा) के उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जो 31 दिसंबर 1988 से पहले दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत थे। बाद में वर्ष 2008 में उन्हें नियमित कर दिया गया। सेवानिवृत्ति के बाद इन्हें केवल नियमित सेवा अवधि के आधार पर ही पेंशन दी गई। कर्मचारियों ने इसे चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें मांग की गई कि उनकी दैनिक वेतन सेवा को भी पेंशन योग्य सेवा में शामिल किया जाए। इससे पहले एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि कर्मचारियों की नियमितीकरण से पहले की सेवा भी पेंशन में जोड़ी जाए।
साथ ही यह निर्देश दिया गया था कि सेवा अभिलेखों का सत्यापन कर लाभ दिया जाए। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील दायर की थी। राज्य की ओर से दलील दी गई कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, वर्क-चार्ज या कंटीजेंसी पेड कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उनकी सेवा को पेंशन में नहीं जोड़ा जा सकता। सरकार ने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार केवल स्थायी और निर्धारित श्रेणी के कर्मचारियों को ही पेंशन का लाभ मिल सकता है।
खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाया कि इस मुद्दे पर पहले भी कई फैसले दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा बाद में नियमित हो जाती है, तो उसकी पूर्व सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले के निर्णयों और शासन के सर्कुलर के आधार पर दैनिक वेतन सेवा को पेंशन के लिए जोड़ना उचित है।