धर्मांतरण..कितने गुनहगार? धर्मांतरण की लड़ाई..सड़क पर आई

Conversion.. how many criminals? The fight for conversion came on the road

Edited By: , September 28, 2021 / 10:30 PM IST

रायपुरः प्रदेश में क्या वाकई धर्मांतरण एक गंभीर मसला है। क्या इसे लेकर किसी बड़े आंदोलन की जरूरत है। ये सवाल इसीलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से भाजपा इसी मुद्दे पर मुखर होकर छत्तीसगढ़ में धरना, प्रदर्शन, आंदोलन कर सरकार को जमकर घेर रही है। भाजपा कहती है की आदिवासी इलाके में सरकार के संरक्षण में धर्मांतरण हो रहा है तो सत्तापक्ष का मानना है कि भाजपा धर्मांतरण का प्रोपेगेंडा कर जनता के वोट बटोरना चाहती है। इसी बीच पुरी के पीठाधीश्वर निश्चलानंद सरस्वती के विचार हैं कि धर्मान्तरण के लिए राजनीतिक दल बड़े जिम्मेदार हैं।

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धर्मांतरण पर पुरी के पीठाधीश्वर निश्चलानंद सरस्वती का कहना हैं कि धर्मान्तरण के लिए 70 प्रतिशत राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं, जबकि 30 फीसदी लोग भावुकता और अन्य कमजोरी के चलते धर्मान्तरण कर रहे हैं। साथ ही वो ये भी मानते हैं कि अगर ये बड़ी समस्या है तो समाधान क्यों नहीं हो पा रहा। इधऱ, छत्तीसगढ़ में भाजपा में धर्मांतरण को लेकर आक्रमक मोड में है। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने चुनाव से पहले ही धर्मांतरण को प्रमुख एजेंडा बनाकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

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मंगलवार को बीजेपी के 16 मंडलों से जुटे कार्यकर्ता रायपुर में धर्मांतरण करने वालों की गिरफ्तारी और इसका विरोध करने वालों की रिहाई की मांग पर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने निकले और अपनी गिरफ्तारी दी। भाजपा नेताओं का आरोप है कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में सरकार के संरक्षण में धर्मांतरण किया जा रहा है। जिसका भाजपा हर स्तर पर विरोध कर रही है। दरअसल, बीते दिनों भाजपा ने बस्तर में चिंतन शिविर में रणनीति बनाकर धर्मांतरण के मुद्दे को बड़ा एजेंडा बनाते हुए लगातार प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

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वहीं, धर्मांतरण पर भाजपा के प्रदर्शऩ पर कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे ने पटलवार करते हुए कहा कि भाजपा धर्मांतरण को छत्तीसगढ़ में मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। चौबे ने भाजपा से पूछा कि प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ काम करने वाले दिलीप सिंह जूदेव ने सैंकड़ों लोगों की हिंदू धर्म में वापसी के लिए काम किया, लेकिन भाजपा ने उनकी हर जगह,हर बार उपेक्षा क्यों की ? चौबे ने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए धर्मांतरण केवल सियासी और कुर्सी प्राप्ति का मुद्दा है, जिसके सहारे वो वोट पाना चाहते हैं। जिसका जवाब छत्तीसगढ़ की जनता देगी ।

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ये तय है कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा धर्मांतकण के मामले में सरकार के खिलाफ बड़ा माहौल बनाने की तैयारी में है। लेकिन क्या 2023 चुनाव में प्रदेश में धर्मांतरण पर वाकई किसी दल को जनता का साथ मिलेगा। एक बड़ा एलेक्शन एजेंडा रहेगा ? क्या वाकई प्रदेश में धर्मांतरण एक गंभीर मुद्दा है ?