Reported By: Devendra Mishra
,Chhattisgarh SIR Latest News
धमतरी: जिले में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर मुस्लिम समाज में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। (Chhattisgarh SIR Latest News) आरोप है कि फर्जी आवेदनों के जरिए बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। इस मामले को लेकर आज मुस्लिम समाज के लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जिला प्रशासन से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
धमतरी जिला मुख्यालय में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत जानबूझकर और साजिश के तहत मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। समाज के लोगों का कहना है कि मगरलोड क्षेत्र से करीब 12 और नवागांव इलाके से लगभग 150 मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिन आवेदनों के आधार पर नाम हटाए गए हैं, वे पूरी तरह से फर्जी हैं। लोगों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना और बिना समुचित सत्यापन के मतदाताओं के नाम काटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। (Chhattisgarh SIR Latest News) समाज का कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम कटना सिर्फ एक कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों को छीनने जैसा है।
SIR प्रक्रिया की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण मुस्लिम समाज में नाराज़गी के साथ-साथ चिंता भी गहराती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नाम नहीं जोड़े गए, तो वे अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि यदि नाम काटने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि SIR प्रक्रिया की अंतिम तिथि 14 फरवरी तय की गई है। ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन जांच के बाद कितनी जल्दी और कितना न्यायपूर्ण कदम उठाता है।
SIR in Chhattisgarh: एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन। देश में 1951 से 2004 के बीच यह आठ बार हुआ। अंतिम बार यह 2004 में किया गया था। अब 21 साल बाद यह किया जा रहा है। जबकि यह करीब सात साल बाद होना चाहिए। यह वोटर लिस्ट को माइक्रो लेवल पर शुद्ध करने की प्रक्रिया है। (Chhattisgarh SIR Latest News) इस प्रक्रिया में ऐसे वोटरों की पहचान कर उनके नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिए जाते हैं। जिनकी मृत्यु हो गई है, जो परमानेंट शिफ्ट हो गए हैं, एक ही राज्य में एक से अधिक वोटर कार्ड बनवा रखे हैं, घुसपैठियों ने वोटर कार्ड बनवा लिए, लापता वोटर और ऐसे कुछ विदेशी वोटर जिनके नाम वोटर लिस्ट में जुड़ गए। इन सभी को एसआईआर प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से बाहर किया जाता है।
SIR in Chhattisgarh: चूंकि देश में लंबे समय से एसआईआर प्रक्रिया नहीं हुई थी। ऐसे में राज्यों की वोटर लिस्ट को शुद्ध करना बेहद जरूरी था। इसी वजह से मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर शुरू करने का यह बीड़ा उठाया। जिसके तहत पहले चरण में बिहार में एसआईआर का काम पूरा कर लिया गया है। दूसरे चरण में यूपी और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में एसआईआर की घोषणा कर दी गई है। तीसरे चरण में बाकी बचे राज्यों में इसे शुरू किया जाएगा।
BLO यानी Booth Level Officer इस प्रक्रिया की रीढ़ हैं। वे घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान की पुष्टि करते हैं, फॉर्म एकत्र करते हैं और सभी दस्तावेजों का सत्यापन करते हैं। BLO यह भी सुनिश्चित करते हैं कि किसी क्षेत्र में डुप्लीकेट या फर्जी एंट्री न रहे।
अगर किसी व्यक्ति का नाम पुरानी वोटर लिस्ट यानी 2003 की सूची में नहीं है, तो उसे Form-6 भरकर नया पंजीकरण कराना होगा। (Chhattisgarh SIR Latest News) यह काम BLO के माध्यम से जा सकता है। आवेदन के साथ पहचान और निवास प्रमाण पत्र संलग्न करना जरूरी होगा।
SIR प्रक्रिया के बाद राज्य की वोटर लिस्ट अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और अपडेटेडबन जाती है। इससे चुनाव के दौरान फर्जी मतदान पर रोक लगती है और हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित होता है। साथ ही, यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत बनाता है।
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