छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू ने सातवां आरोपपत्र दाखिल किया

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छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू ने सातवां आरोपपत्र दाखिल किया

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  • Publish Date - November 26, 2025 / 09:18 PM IST,
    Updated On - November 26, 2025 / 09:18 PM IST

रायपुर, 26 नवंबर (भाषा) रायपुर की विशेष अदालत में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कथित शराब घोटाले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी सहित कुल छह लोगों के खिलाफ बुधवार को सातवां आरोपपत्र दाखिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

ईओडब्ल्यू के मुताबिक, यह कथित घोटाला 2019 और 2022 के बीच हुआ था, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।

अधिकारियों ने बताया कि आज ईओडब्ल्यू ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर के समक्ष आबकारी विभाग के तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव निरंजन दास सहित छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में अब तक कुल 50 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपपत्र में दास के अलावा शराब कारोबारी अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा, होटल मालिक नितेश पुरोहित और उनके पुत्र यश पुरोहित, तथा दीपेन चावड़ा का नाम शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि जांच में यह पाया गया कि निरंजन दास ने लगभग तीन वर्षों तक आबकारी विभाग में अपनी पदस्थापना अवधि के दौरान आबकारी नीति और अधिनियम में गैर-जरूरी बदलाव और विशेष व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने वाले संशोधन किए।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा, विभागीय निविदा की शर्तों में हेरफेर और व्यवस्थापन में जानबूझकर गड़बड़ी की गई, ताकि विभाग में सक्रिय सिंडिकेट को कमीशन उगाही में सीधा लाभ मिल सके। इस सिंडिकेट को पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर का संरक्षण प्राप्त था।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह भी सिद्ध हुआ कि निरंजन दास को इस अवैध सहयोग के बदले प्रति माह न्यूनतम 50 लाख रुपये की हिस्सेदारी मिलती थी। उन्होंने बताया कि आबकारी विभाग में उनकी पदस्थापना अवधि के दौरान किए गए लेन-देन के विश्लेषण से अब तक की जांच में ऐसे ठोस प्रमाण मिले हैं कि उन्हें इस व्यवस्था से कम से कम 16 करोड़ रुपये की अवैध राशि प्राप्त हुई है।

उन्होंने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि विदेशी मदिरा पर शराब निर्माता कंपनियों से जबरन कमीशन उगाही के लिए बनाई गई दोषपूर्ण एफएल-10-ए लाइसेंसी प्रथा के लाभार्थी, लाइसेंसी कंपनी ‘ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड’ के संचालक आरोपी अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा, सिंडिकेट और शराब प्रदाता कंपनियों के बीच कमीशन राशि पहुंचाने का कार्य करते थे।

अधिकारियों ने बताया कि इस नीति के कारण राज्य को अनुमानित 530 करोड़ रुपये का राजस्व हानि हुई, जिसमें से लगभग 114 करोड़ रुपये का अवैध लाभ आरोपियों और उनकी कंपनी को मिला।

उन्होंने बताया कि अन्य अभियुक्तों में सिंडिकेट के प्रमुख अनवर ढेबर के सहयोगी नितेश पुरोहित और पुत्र यश पुरोहित ने शराब घोटाले से उगाही गई रकम को रायपुर स्थित अपने होटल ‘गिरिराज’ में एकत्र, छिपाने और स्थानांतरित करने में मदद की।

प्रारंभिक जांच के अनुवार इनके माध्यम से सिंडिकेट की लगभग 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि का प्रबंधन किया जाना पाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि अनवर ढेबर का मित्र एवं होटल ‘वेलिंग्टन कोर्ट’ का प्रबंधक दीपेन चावड़ा सिंडिकेट की बड़ी रकम को शीर्ष व्यक्तियों तक पहुंचाने, रुपयों को सुरक्षित रखने और हवाला आदि के माध्यम से अवैध लेन-देन करने का कार्य करता था।

उन्होंने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि आयकर विभाग के छापों (फरवरी 2020) के बाद दीपेन चावड़ा ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक नकद और सोने को संग्रहित किया और अनवर के निर्देशानुसार अलग-अलग ठिकानों पर सुरक्षित रखा।

उन्होंने बताया कि सभी आरोपी वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं।

इस कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुरू की थी। ईडी के मुताबिक, 2019–2022 के बीच यह घोटाला 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का था। ईओडब्ल्यू ने पिछले साल 17 जनवरी को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड समेत 70 लोगों और कंपनियों के नाम शामिल थे।

अब तक इस मामले में सात आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और 12 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ईडी ने इस साल जुलाई में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को, जबकि जनवरी में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, इंडियन टेलीकॉम सर्विस के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।

भाषा संजीव खारी

खारी