छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जंगल में दिखी दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरी

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जंगल में दिखी दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरी

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 10:13 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 10:13 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

रायपुर, 27 मई (भाषा) छत्तीसगढ़ में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के जंगल में एक दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरी देखी गई। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

क्षेत्र के वन मंडल अधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि 16 से 22 मई तक बलौदाबाजार वन प्रभाग के देवपुर वन क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन शिविर (समर कैंप) के हिस्से के रूप में आयोजित ‘बर्डिंग ट्रेल’ (पक्षी-दर्शन यात्रा) के दौरान यह गिलहरी देखी गई।

उन्होंने बताया कि पेड़ पर रहने वाली इस दुर्लभ गिलहरी को, जिसे ‘मालाबार विशाल गिलहरी’ के नाम से भी जाना जाता है, बलौदाबाजार के प्रकृति और पक्षी प्रेमी हेमंत वर्मा ने पहचाना।

गणवीर ने कहा कि देवपुर जंगल में इस प्रजाति का दिखना, इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक रूप से ‘रतुफ़ा इंडिका’ के नाम से जानी जाने वाली यह भारतीय विशाल गिलहरी, भारत में पायी जाने वाली सबसे बड़ी गिलहरियों में से एक है। उन्होंने कहा कि आम गिलहरियों की तुलना में यह काफी बड़ी होती है और अपनी पूंछ सहित इसकी लंबाई लगभग तीन फीट तक हो सकती है।

वन मंडल अधिकारी ने बताया कि यह गिलहरी अपने गहरे लाल, काले, भूरे और क्रीम रंगों के आकर्षक मिश्रण के लिए जानी जाती है, जिससे इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।

गणवीर ने कहा कि यह प्रजाति पूरी तरह से पेड़ पर रहती है और अपना अधिकांश जीवन ऊंचे पेड़ों पर ही बिताती है। यह शायद ही कभी जमीन पर उतरती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक 20 फीट तक की छलांग लगाने में सक्षम होती है।

उन्होंने बताया कि इस प्रजाति को ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ़ नेचर’ (आईयूसीएन) द्वारा ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है, हालांकि वनों की कटाई इसके प्राकृतिक आवास पर लगातार बुरा असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ के तहत इस प्रजाति का शिकार करना या इसका व्यापार करना प्रतिबंधित है और इसके लिए दंड का प्रावधान है।

गणवीर ने बताया कि बलौदाबाजार स्थित ‘बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य’ और उसके आसपास के वन क्षेत्र जैव विविधता के मामले में अत्यंत समृद्ध हैं।

उन्होंने कहा, ‘वन्यजीवों का इस तरह दिखना हमें वनों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को महसूस करने का अवसर प्रदान करता है।’

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने इस पर वन विभाग की टीम को बधाई दी और कहा कि यह राज्य सरकार की वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा की पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।

भाषा संजीव राजकुमार

राजकुमार