आरक्षण पर शह-मात.. आदिवासी किसके साथ? आरक्षण की लड़ाई..’विशेष सत्र’ पर आई !
Government convenes a 'special session' regarding tribal reservation
रायपुरः इस वक्त प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा अगर कोई मुद्दा है तो वो है, आदिवासी आरक्षण। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा ST मोर्चा ने प्रदेश के सभी जिलों में चक्काजाम कर दबाव बनाने की कोशिश की तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष ने मुद्दे के समाधान की तरफ कदम बढ़ाते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा। जिसपर राज्यपाल ने भी फौरन सहमति दे दी है…हालांकि इसपर भी सियासी बयान नहीं थमे। पूर्व सीएम ने कटाक्ष किया कि सत्र से क्या होगा सरकार एक्शन से…अब बड़ा सवाल ये विशेष सत्र में क्या होगा? क्या सरकार इस पर कोई कदम उठाने जा रही है…
आदिवासियों के आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी कितनी आक्रामक है। चुनावी मैदान में उतरने से पहले खुद को आदिवासी हितैषी बताने के लिए पूरी जतन कर रही है। इस रणनीति के तहत बीजेपी ने आज प्रदेशभर के जिलों में चक्का जाम कर अपना विरोध प्रदर्शन किया। रायपुर से जशपुर तक और अंबिकापुर से भानुप्रतापपुर तक बीजेपी ने ST मोर्चा ने आदिवासी नेताओं के नेतृत्व में चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान बीजेपी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि ये आदिवासियों के लिए जीवनमरण का मुद्दा है, जबतक न्याय नहीं मिलेगा आंदोलन जारी रहेगा।
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बीजेपी के चक्काजाम पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी केवल राजनीतिक लाभ के लिए प्रदर्शन कर रही है। दूसरी ओर राज्य सरकार ने विधानसभा में दो दिन का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा था। जिसे राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। आदिवासी आरक्षक्ष कोलेकर 1 और 2 दिसबंर को बुलाए गए विशेष सत्र पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रस जहां फैसले का स्वागत कर रही है तो बीजेपी का कहना है कि विशेष सत्र का कोई मतलब नहीं।
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कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर शह और मात का खेल जारी है। मिशन 23 की तैयारी में जुटी बीजेपी और कांग्रेस दोनों ये साबित करने में जुटी है कि आदिवासियों की एक मात्र हितैषी वही है? अब ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि आदिवासी किस पर विश्वास जताते है।

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