छत्तीसगढ़ में भाजपा ने सभी पांच आरक्षित लोकसभा सीट पर जीत हासिल की

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छत्तीसगढ़ में भाजपा ने सभी पांच आरक्षित लोकसभा सीट पर जीत हासिल की

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  • Publish Date - June 5, 2024 / 01:01 AM IST,
    Updated On - June 5, 2024 / 01:01 AM IST

रायपुर, चार जून (भाषा) छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से बस्तर सीट छीनते हुए राज्य की सभी पांच आरक्षित लोकसभा सीट पर जीत हासिल की।

राज्य की कुल 11 लोकसभा सीट में से बस्तर, कांकेर, रायगढ़ और सरगुजा अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए तथा जांजगीर-चांपा अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए सुरक्षित है।

राज्य में भाजपा ने 11 में से 10 सीट पर जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस अपनी कोरबा लोकसभा सीट बचाने में सफल रही।

सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में से बस्तर लोकसभा क्षेत्र में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां भाजपा के महेश कश्यप ने कांग्रेस के प्रभावशाली आदिवासी नेता और मौजूदा विधायक कवासी लखमा को 55,245 मतों से हराया। 2019 में बस्तर कांग्रेस द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक थी।

कांग्रेस ने अपने मौजूदा सांसद और पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दीपक बैज को टिकट नहीं दिया था तथा छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे लखमा को मैदान में उतारा था।

पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से आए पूर्व विधायक चिंतामणि महाराज ने सरगुजा निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस की शशि सिंह के खिलाफ 64,822 मतों के अंतर से जीत हासिल की।

रायगढ़ में भाजपा के राधेश्याम राठिया कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. मेनका देवी सिंह से 2,40,391 मतों के अंतर से विजयी हुए। सिंह सारंगढ़ के तत्कालीन राजघराने से ताल्लुक रखती हैं।

भाजपा के भोजराज नाग ने कांग्रेस के उम्मीदवार बीरेश ठाकुर के खिलाफ कांकेर (एसटी) सीट 1,884 मतों के अंतर से जीत हासिल की। ठाकुर 2019 में कांकेर सीट से इसी तरह 6,914 मतों के मामूली अंतर से हार गए थे।

राज्य में एकमात्र एससी-आरक्षित जांजगीर-चांपा सीट पर भाजपा की महिला नेता कमलेश जांगड़े ने कांग्रेस उम्मीदवार और राज्य के पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया को 60 हजार मतों के अंतर से हराया।

भाजपा ने राज्य में 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में 11 में से 10 सीटें जीती थीं। 2019 में कांग्रेस 11 में से दो सीटें जीतने में सफल रही और उनमें से एक एसटी आरक्षित सीट बस्तर थी।

राजनीतिक पर्यवेक्षक आर. कृष्ण दास ने इन परिणामों को लेकर कहा, ”भाजपा 2000 में राज्य के गठन के बाद से लोकसभा चुनावों में पारंपरिक रूप से आरक्षित सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती रही है। 2009 में परिसीमन से पहले, राज्य में छह आरक्षित लोकसभा सीटें थीं- चार एसटी के लिए और दो एससी के लिए।”

दास ने कहा, ”2019 में कांग्रेस बस्तर (एसटी) जीतने में सफल रही थी, लेकिन इस बार वह वहां अपना प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी।”

उन्होंने कहा कि पिछले साल के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने आदिवासी बहुल सीटों पर भी अच्छा प्रदर्शन किया। पार्टी अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित 29 विधानसभा क्षेत्रों में से 17 पर जीत हासिल की थी।

दास ने कहा कि राज्य की आबादी में लगभग 32 फीसदी आदिवासी हैं, जो मुख्य रूप से राज्य के सरगुजा (उत्तरी छत्तीसगढ़) और बस्तर (दक्षिणी छत्तीसगढ़) संभागों में रहते हैं।

उन्होंने कहा कि एससी आबादी वाली सीटों पर कांग्रेस ने पिछले साल के विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था तथा राज्य में एससी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 10 विधानसभा सीटों में से छह पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में एकमात्र एससी आरक्षित लोकसभा सीट जांजगीर-चांपा में इसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

भाषा संजीव जितेंद्र

जितेंद्र

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