Reported By: Rajesh Raj
,Chhattisgarh Swine Flu News || Image- Wild Life File
रायपुर: छत्तीसगढ़ के जंगली सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर फैलने की पुष्टि हुई है। हाल ही में कई जिलों में बड़ी संख्या में जंगली सुअरों की मौत के बाद उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। (Chhattisgarh Swine Flu News) बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने जांच के बाद सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि की है। रिपोर्ट सामने आते ही वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।
वन मुख्यालय ने प्रदेश के कई डीएफओ को सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग इस बात को लेकर विशेष निगरानी रख रहा है कि जंगली सुअरों में फैला वायरस अन्य वन्य जीवों तक न पहुंचे। मैदानी अमले को भी निगरानी बढ़ाने और किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जंगली सुअरों से अन्य वन्य जीवों में इस बीमारी के फैलने की आशंका कम रहती है, फिर भी एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में बलौदाबाजार और महासमुंद सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जंगली सुअरों की मौत की घटनाएं सामने आई थीं। (Chhattisgarh Swine Flu News) इसके बाद वन विभाग ने मरे हुए सुअरों के सैंपल लेकर जांच के लिए बरेली भेजे थे। पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण पाण्डेय ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखने और आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
स्वाइन फ्लू एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से सूअरों में पाई जाती है, लेकिन यह इंसानों में भी फैल सकती है। इसे वैज्ञानिक रूप से H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस कहा जाता है। यह इन्फ्लुएंजा (फ्लू) वायरस का ही एक प्रकार है।
संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से
संक्रमित सतह को छूकर फिर मुंह, नाक या आंखों को छूने से
यह बीमारी आम फ्लू की तरह ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है।
तेज बुखार
खांसी
गले में खराश
नाक बहना
शरीर और सिर दर्द
थकान
कभी-कभी उल्टी और दस्त
हाथों को बार-बार साबुन से धोएं
भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें
खांसते/छींकते समय मुंह ढकें
फ्लू के लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
ज्यादातर मामलों में यह सामान्य फ्लू जैसा ही होता है और इलाज से ठीक हो जाता है। (Chhattisgarh Swine Flu News) लेकिन बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए यह गंभीर हो सकता है। समय पर इलाज और सावधानी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।