Chhattisgarh Tribal Politics : आदिवासियों को साधने के लिए छत्तीसगढ़ में ये काम करने जा रही कांग्रेस! राष्ट्रीय अध्यक्ष भी पहुंचेंगे रायपुर, कई बड़े नेताओं को मिला जिम्मा
छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस आदिवासी सलाहकार परिषद के जरिए आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है, जबकि बीजेपी ने कांग्रेस पर आदिवासियों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
Chhattisgarh Tribal Politics
- कांग्रेस रायपुर में बड़ी बैठक कर आदिवासी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करेगी।
- आदिवासी अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
- बीजेपी ने कांग्रेस पर आदिवासियों के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
रायपुर : Chhattisgarh Tribal Politics छत्तीसगढ़ की राजनीति में अब आदिवासी मुद्दों पर सियासत तेज होती दिख रही है। कांग्रेस ने आदिवासी सलाहकार परिषद के जरिए प्रदेश के आदिवासियों को सरकार के खिलाफ लामबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस का आरोप है कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा नहीं हो पा रही है। वहीं बीजेपी ने कांग्रेस पर आदिवासियों के नाम पर राजनीति और घोटाले करने का आरोप लगाया है।
Congress Tribal Meeting Raipur राजधानी रायपुर में होगी बड़ी बैठक
दिल्ली में हुई आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय बैठक के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस आदिवासी मोर्चे को मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी इसी महीने राजधानी रायपुर में बड़ी बैठक करने जा रही है, जिसमें आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया भी शामिल होंगे। कांग्रेस ने अपने आदिवासी पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को आदिवासी इलाकों में सक्रिय होने का जिम्मा सौंपा है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा।
आदिवासी अंचल की नाराज़गी सत्ता से बाहर होने की बड़ी वजह
सरगुजा से लेकर बस्तर तक जल, जंगल और जमीन पर कब्जे की कोशिश हो रही है और आदिवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि आदिवासी अंचल की नाराज़गी ही पिछली बार सत्ता से बाहर होने की बड़ी वजह बनी। पार्टी अब एक बार फिर आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आदिवासी समाज को यह महसूस नहीं हो रहा कि प्रदेश में उनकी सरकार है और यही असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
कांग्रेस ने आदिवासियों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया
वहीं कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने भी तीखा पलटवार किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने सालों तक आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और अब सत्ता से बाहर होने के बाद उन्हें आदिवासियों की याद आ रही है। कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, कांग्रेस का कोरा सपना है। कांग्रेस अपनी जमीन तलाश रही है। जमीन तलाशने की बौखलाहट में कुछ भी बोल रही है। कांग्रेसियों को समझना चाहिए कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय बीजेपी के और नज़दीक हुआ है। आदिवासी क्षेत्रों में सभी तरह के विकास और योजनाएं पहुँची हैं। जनजाति समाज से मुख्यमंत्री हैं, आदिवासी क्षेत्रों में लोग खुशहाल हैं।
आदिवासी राजनीति का नया दांव प्रदेश की सियासत में डालेगा कितना असर
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। सरगुजा और बस्तर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों की राजनीतिक दिशा अक्सर सत्ता का रास्ता तय करती है। ऐसे में कांग्रेस आदिवासी असंतोष को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, जबकि बीजेपी अपनी योजनाओं और संगठन के दम पर आदिवासी समाज के बीच पकड़ मजबूत होने का दावा कर रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में आदिवासी राजनीति का ये नया दांव प्रदेश की सियासत में कितना असर डालता है।
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