Rajnandgaon Namakaan Politics
रायपुर। राजनांदगांव में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रत्याशी भूपेश बघेल की अपील बेअसर साबित हुई। उन्होंने कहा था ईवीएम को हटाने के लिए 375 से ज्यादा प्रत्याशी नामांकन भरेंगे। कार्यकर्ता उनकी आवाज पर फॉर्म भरने उमड़ पड़ेंगे। मीडिया को भी लग रहा था बघेल की अपील का इतना तो असर होगा। लेकिन, जब नामांकन की तारीख खत्म हो गई तो पता चला बघेल को 375 तो क्या पूरे ढाई सौ लोग भी नहीं मिल पाए और जो मिले वो फॉर्म तो ले गए, पर जमा करने नहीं आए।
बघेल ने पांसा फेंका, ईवीएम को चकमा देने की रणनीति बनाई, कार्यकर्ताओं से अपील की, लोकसभा प्रत्याशी के लिए फॉर्म भरने के लिए कहा। तारीखें निकलती रहीं। कुछ लोगों ने बड़ी संख्या में फॉर्म खरीदे। लेकिन, जब फॉर्म जमा करने की बारी आई तो कोई नहीं पहुंचा। इधर बघेल इंतजार करते रहे। आस लगाए कार्यकर्ताओं को तकते रहे। बघेल को आखिरकार उतने कार्यकर्ता भी नहीं मिल पाए जितने ईवीएम को रोकने के लिए चाहिए थे। अब भाजपा बघेल पर तंज कस रही है।
एक दिन पहले ढाई सौ फॉर्म्स लिए गए। लेकिन, जब भरने की बारी आई तो बघेल को उनके ही कार्यकर्ता धता दिखाते नजर आए। सियासत में अगर कोई हार मान जाए तो वह नेता ही कैसा? सो बैज सामने आए और ईवीएम की खिलाफत में बघेल के सुर में सुर मिलाते दिखे। आखिर में राजनांदगांव से 23 प्रत्याशियों ने फॉर्म भरा है। 5 अप्रैल को स्क्रूटनी होगी, फिर नाम वापस लिए जा सकेंगे। अब सवाल है, क्या पूर्व मुख्यमंत्री से उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता इतने नाराज हैं कि इनकी संख्या 200 पार भी नहीं जा सकी।