Reported By: Rajesh Raj
,Unsurveyed Villages Chhattisgarh: 'गुमनाम' गांव! ना सरकारी रिकॉर्ड...ना कोई वजूद, इन 1100 गांव की अफसरों को खबर ही नहीं, बस्तर ही नहीं रायपुर में भी अनसर्वेड गांव / Image : IBC24
रायपुर: Unsurveyed Villages Chhattisgarh क्या आप यकीन करेंगे कि आजादी के 80 साल बाद भी छत्तीसगढ़ के 1100 गांव ऐसे हैं, जिनका सरकारी रिकॉर्ड में कोई वजूद ही नहीं है? सरकार को ये तो पता है कि प्रदेश डिजिटल हो रहा है, लेकिन ये नहीं पता कि इन 1100 गांवों में कितनी जमीन है, कितने लोग रहते हैं और किसके नाम पर कौन सा खेत है। हैरानी की बात ये है कि इसमें सिर्फ बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाके ही नहीं, बल्कि रायपुर, बिलासपुर और धमतरी जैसे मैदानी जिले भी शामिल हैं। आखिर क्यों ‘गुड गवर्नेंस’ का दावा करने वाले राज्य में ये गांव आज भी ‘गुमनाम’ हैं?
Unsurveyed Villages Chhattisgarh ‘गुमनाम’ गांव के ये आंकड़े आपको हैरान कर देंगे। छत्तीसगढ़ के 33 में से 29 जिलों के 1090 गांव आज भी सरकारी सर्वे से कोसों दूर हैं। यानी इन गांवों का राजस्व रिकॉर्ड शून्य है। बस्तर, बीजापुर या सुकमा में नक्सलियों के खौफ के कारण सर्वे नहीं हुआ, ये तर्क समझ आता है। लेकिन जब लिस्ट में बलौदाबाजार, धमतरी और कोरबा जैसे शांत जिलों का नाम आता है, तो सिस्टम की सुस्ती उजागर हो जाती है। इन गांवों में न सड़क का हिसाब है, न नालों का और न ही निजी जमीनों का कोई नक्शा।
बस्तर संभाग- 571 गांव
धमतरी- 115 गांव
कोरबा- 122 गांव
बलौदाबाजार- 64 गांव
मुंगेली- 46 गांव
रायपुर- 04 गांव
लापरवाही की हद देखनी हो तो राजधानी रायपुर का उदाहरण देख लीजिए। यहां के 4 गांव सिर्फ इसलिए ‘अनसर्वेड’ लिस्ट में हैं क्योंकि विभाग के पास उनका नक्शा फट चुका था। 2021 से अब तक आधा दर्जन से ज्यादा पत्र लिखे गए, रिकॉर्ड पोर्टल पर मौजूद हैं, लेकिन फाइलों के मकड़जाल ने इन गांवों को आज भी ‘बिना नक्शे’ का घोषित कर रखा है। दुर्गम इलाकों में तो बहाना नदी और पहाड़ों का है, लेकिन रायपुर में बहाना सिर्फ सरकारी लेटलतीफी है।
अब जब प्रदेश में आईआईटी रुड़की के जरिए हाई-टेक सर्वे का काम शुरू हुआ है और नक्सलवाद के पैर उखड़ रहे हैं, तो उम्मीद जगी है। डिजिटल इंडिया और पेपरलेस गवर्नेंस के दौर में 1100 गांवों का ‘गुमनाम’ होना एक बड़ा दाग है। देखना होगा कि ये दाग आखिर कब तक धुल पाता है।