Vijay Sharma on IBC24 News || Image- IBC24 News File
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश के साथ ही देशभर में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में तेजी से कदम बढ़ रहे हैं। (Vijay Sharma on IBC24 News) फोर्स जिस गति से आगे बढ़ रही है और माओवादी जिस तेजी से जंगलों से बाहर आकर समाज की मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं, उससे यह विश्वास जताया जा रहा है कि तय डेडलाइन 31 मार्च तक केंद्र और राज्य सरकार अपना संकल्प पूरा कर लेंगी।
दरअसल, 1 मार्च को माओवादी संगठन की विशेष क्षेत्रीय समिति स्तर के सदस्य विकास सहित 15 नक्सलियों ने महासमुंद जिले में सुरक्षाकर्मियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं भी शामिल हैं। ये नक्सली प्रतिबंधित संगठन के बालांगीर-बरगढ़-महासमुंद डिवीजन से जुड़े थे और छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय थे।
हथियार छोड़, संविधान और तिरंगे का थामा हाथ 🇮🇳
विकास उर्फ बाबन्ना जो स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) के रूप में सक्रिय था उसके साथ कुल 15 माओवादियों ने, जिन पर लगभग ₹73 लाख का इनाम घोषित था, अपने पास रखे 3 AK-47 सहित 14 हथियार समाज के समक्ष समर्पित किए और पुनर्वास नीति का लाभ लेते हुए… pic.twitter.com/yKfnjoXJPJ
— Vijay sharma (@vijaysharmacg) March 1, 2026
वहीं, IBC24 ने माओवादी विकास के आत्मसमर्पण में बड़ी भूमिका निभाई है। यह बात प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने चैनल से बातचीत में स्वीकार की। विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम बताया। (Vijay Sharma on IBC24 News) उन्होंने कहा कि ओडिशा में सर्च ऑपरेशन रोके जाने के बाद माओवादी विकास और अन्य नक्सली जंगलों से बाहर आ सके। साथ ही IBC24 की टीम ने नक्सलियों और सरकार के बीच संपर्क स्थापित कराया, जिसके बाद उनकी वापसी संभव हो सकी।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने माओवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च 2026 को लेकर भी अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि फिलहाल 5 से 10 प्रतिशत के बीच नक्सली शेष हैं, जबकि शीर्ष कैडर समाप्त हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि 31 मार्च 2027 से केंद्रीय बल बस्तर से लौटना शुरू करेंगे। गृहमंत्री के अनुसार बस्तर का भविष्य वन उपज आधारित अर्थव्यवस्था पर टिका होगा और सरकार नक्सल उन्मूलन के साथ-साथ क्षेत्र के विकास और आदिवासियों के कल्याण के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।
अपनी बातचीत में उन्होंने बताया कि, किस तरह से सीएम विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में ओडिशा के सीएम से बातचीत कर एक सुरक्षित रास्ता नक्सलियों के लिए तैयार किया गया ताकि वे बाहर आ सके और इस कवायद में उन्हें कामयाबी मिली। विजय शर्मा ने बताया कि, आज आत्मसमर्पण करने वाले 90% नक्सली बस्तर रीजन से थे लिहजा वे छत्तीसगढ़ में ही सरेंडर करना चाहते थे।