रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचल एवं सुदूर क्षेत्रों में स्थित गांवों में निवासरत महिलाएं अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने आयमूलक गतिविधियां करना शुरू किया है, जिससे उनके जीवन में नया सबेरा आया है। वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। कोंडागांव जिला में एनआरएलएम से प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता प्राप्त कर फरसगांव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम मोहलई की जय मां बमलेश्वरी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा सब्जी उत्पादन का कार्य किया जा रहा है।
समूह की फूलन बाई पांडे बताती हैं कि समूह के द्वारा लगभग ढाई एकड़ कृषि भूमि पर करेला एवं मिर्ची की खेती की जा रही है। इसके लिए समूह को योजनांतर्गत बैंक लिंकेज के माध्यम से 2 लाख रुपए का ऋण निम्न ब्याज दर पर प्राप्त हुआ था, जिसे खेती में लगाकर आजीविका संवर्धन किया जा रहा है। अब तक उनके द्वारा सब्जी बेचकर लगभग 70 हजार रुपए तक का शुद्ध आय प्राप्त हो चुका है। इसके साथ ही महिलाएं मछली पालन का भी कार्य कर रही है, जिससे उन्होंने अब तक 70 हजार 800 रुपए कमाया है।
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कोंडागांव के ही फरसगांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत हिर्री की मां शीतला स्व-सहायता समूह मछली पालन का कार्य कर रही है। इसके लिए समूह को योजनांतर्गत बैंक लिंकेज के माध्यम से 5 लाख रूपए का ऋण निम्न ब्याज दर पर प्राप्त हुआ था। महिलाओं ने मछलियों का स्थानीय बाजारों में विक्रय कर अब तक 65 हजार रुपए तक का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। फरसगांव ब्लॉक के ही ग्राम पंचायत मोदे के सूरज स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा दिसंबर 2021 से छोटे स्तर पर मुर्गी पालन का कार्य किया जा रहा है।
इस व्यवसाय से समूह की महिलाओं को अब तक 65 हजार 300 रुपए का शुद्ध आय प्राप्त हो चुका है। फरसगांव ग्राम ब्लॉक के ही ग्राम पंचायत कोर्राबड़गांव के वसुंधरा स्व-सहायता समूह की महिलाएं अप्रैल 2022 से किराना दुकान संचालन का कार्य कर रहे हैं, जिससे समूह की महिलाओं को अब तक 54 हजार रुपए तक का शुद्ध आय प्राप्त हो चुका है।