Sangeet Natak Akademi Award | Photo Credit: AI
रायपुर: Sangeet Natak Akademi Award छत्तीसगढ़ के संस्कृतिकर्मी अनूप रंजन पांडेय को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (Sangeet Natak Akademi Award) से सम्मानित किया। नई दिल्ली में हुए समारोह में उन्हें लोक और जनजातीय कला के संरक्षण में योगदान के लिए यह सम्मान मिला। पांडेय ने पुरस्कार को छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों और प्रदेश की जनता को समर्पित किया।
Sangeet Natak Akademi Award विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय को बधाई दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि ‘छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और जनजातीय परंपराओं को देशभर में नई पहचान दिलाने वाले पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय जी को माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा “संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार” से सम्मानित किए जाने पर हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।
“बस्तर बैंड” के माध्यम से आपने बस्तर की मिट्टी से जुड़ी लोकधुनों, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय जीवन की सुंदरता को देश के विभिन्न मंचों तक पहुंचाया है। यह सम्मान केवल आपके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोक एवं जनजातीय संस्कृति का भी सम्मान है।’
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और जनजातीय परंपराओं को देशभर में नई पहचान दिलाने वाले पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय जी को माननीय राष्ट्रपति महोदया श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा “संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार” से सम्मानित किए जाने पर हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।
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— Dr Raman Singh (@drramansingh) August 14, 2026
अनूप रंजन पांडेय का जन्म 21 जुलाई 1965 को बिलासपुर में हुआ। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसा से उनका जुड़ाव रहा है। संगीत और संस्कृति की शुरुआती सीख उन्हें अपनी मां और भजन गायिका स्वर्गीय मनोरमा पांडेय तथा पिता और संस्कृत विद्वान स्वर्गीय राधेश्याम पांडेय से मिली। नौ साल की उम्र में उन्होंने रेलवे स्कूल बिलासपुर के मंच से पहली प्रस्तुति दी। 1990 के दशक में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन से जुड़े और गांव-गांव जाकर नुक्कड़ नाटकों के जरिए साक्षरता, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने 3000 से ज्यादा नुक्कड़ नाटकों में काम किया।