Kisano ka karja maaf
सरगुज़ा। जिले में एक ऐसा अनचाहा रिकार्ड बन गया है जिसने 52 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। इस रिकॉर्ड टूटने से ऐसी अंदेशा जताया जा रहा है कि इसका असर आने वाले दिनों में लोगों को झेलना पड़ेगा। हालांकि, इसका फसल औऱ फलो पर प्रभाव मिला जुला देखा जा रहा है। सरगुज़ा में वर्ष 1971 में ऐसी स्थिति बनी थी, कि करीब 127 दिन तक सरगुज़ा वर्षा के बूंद को तरसा था। मगर इस बार 1971 का रिकार्ड भी टूट गया है और सरगुज़ा जिले में 130 दिन से ज्यादा अवर्षा की स्थिति हो चुकी है और आगे भी मौषम को देखते हुए बारिश की संभावना नज़र आ रही।
130 दिनों से नहीं हुई बारिश
दरअसल, सरगुज़ा जिले में अमूमन अक्टूबर से जनवरी तक औसतन 63 एमएम बारिश दर्ज की जाती रही है। मगर इस बार करीब 130 दिनों से सरगुज़ा में बारिश ही नही हुई जो कि एक रिकॉर्ड है। मौसम विज्ञानी की माने तो कमजोर पश्चिमी विछोभ के कारण ऐसी स्थिति बनी थी जो कि एक चिंताजनक स्थिति है। मौसम विज्ञानी यह भी कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में भी बारिश की कोई संभावना नजर नहीं आ रही, जिसके कारण आने वाले दिनों में गर्मी का कहर ज्यादा लोगों को चलना पड़ेगा। वर्षा की स्थिति के कारण सरगुजा में इस बार गर्मी की दस्तक समय से पहले ही महसूस होने लगी है। ऐसे में साफ है कि लोगों को आने वाले दिनों में भीषण गर्मी झेलनी पड़ेगी मगर वर्षा की स्थिति का असर फसलों और फलों के उत्पादन पर भी पढ रहा है।
मौसम विज्ञानी का कहना
कृषि वैज्ञानिक की माने तो आम और लीची के लिए बारिश ना होना एक बेहतर संकेत है। मगर फसल और खासकर गेहूं के लिए बारिश बेहद जरूरी होती है। यही नहीं आम और लीची के पेड़ों में फल लगने के बाद बारिश की आवश्यकता होती है और अगर बारिश नहीं होती है तो लगे हुए फल झड़ सकते हैं। ऐसे में कृषि विज्ञानी का कहना है कि सरगुजा में बारिश की स्थिति का फसल और फलों पर मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है।
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