Vishnu Ka Sushasan. Image Source- IBC24
रायपुरः Vishnu Ka Sushasan: 1 नवंबर 2000 को भारत के हृदय स्थल मध्य प्रदेश से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ का जन्म हुआ। साल 2025 में राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। हमारा प्रदेश इस वर्ष अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है। छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय रही है। एक ओर जहां यह राज्य खनिज संपदा में समृद्ध है, वहीं दूसरी ओर कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था ने भी इसे एक मजबूत आधार दिया है। छत्तीसगढ़ ने राज्य महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है।
1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ ने एक स्वतंत्र राज्य के रूप में जन्म लिया, तो इसके समक्ष कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतिया थीं। इन चुनौतियों में महिलाओं की स्थिति एक महत्वपूर्ण पहलू रही। छत्तीसगढ़ जैसे सामाजिक-आर्थिक रूप से विविध राज्य में महिलाओं की भूमिका पारंपरिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संदर्भों से जुड़ी हुई थी। राज्य निर्माण के समय की तुलना में आज महिलाओं की स्थिति में कई सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। इस रजत जयंती वर्ष में साय सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कई अहम फैसले लिए है। इनमें से एक महतारी वंदन योजना है। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने एक-एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है।
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Vishnu Ka Sushasan: बता दें कि छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर जहां मातृत्व की ममता और नारीत्व की गरिमा सदियों से पूजनीय रही है। वहीं आज एक नई सामाजिक क्रांति आकार ले रही है, महतारी वंदन योजना के रूप में। यह केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि नारी गरिमा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का महोत्सव बन गई है, जिसने राज्य की लाखों महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन जीने की दिशा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मार्च 2024 को महतारी वंदन योजना का शुभारंभ करते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की हर मां, बहन और बेटी को मुख्यधारा में लाने का संकल्प है। उन्होंने इसे “नारी गरिमा का उत्सव” कहा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सक्रिय भागीदारी से यह योजना बहुत ही कम समय में जन-आंदोलन में परिवर्तित हो गई। शासन की प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और समर्पण ने इसे घर-घर तक पहुंचा दिया।
मार्च 2024 से जुलाई 2025 तक कुल 17 किश्तों में लगभग 70 लाख महिलाओं को 11 हजार 08 करोड़ रूपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। यह केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन सपनों की पूंजी है जिन्हें अब तक परिस्थितियों ने दबा दिया था। योजना से महिलाओं को जो आत्मबल मिला, उसने उनके जीवन को नए आयाम दिए। आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं। किसी ने छोटा व्यवसाय शुरू किया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों को सहजता से पूरा किया। यह आर्थिक संबल महिलाओं को आत्मविश्वास, सामाजिक पहचान और सम्मान दे रहा है। वे अब केवल पारंपरिक भूमिकाओं में सीमित नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक रीढ़ और समाज की निर्णायक शक्ति बनती जा रही हैं।
आज जब हम छत्तीसगढ़ की गलियों और घरों में झांकते हैं, तो वहां हमें आंकड़ों से परे एक विश्वास, आत्मबल और आशा की कहानी दिखाई देती है। महतारी वंदन योजना अब केवल सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज की मुस्कान बन गई है। छत्तीसगढ़ की हर मां-बेटी की आवाज़ में अब यह आत्मविश्वास झलकता है। योजना की असली तस्वीर उन कहानियों में है, जो अब गांव-गांव में प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। कंचन जो ग्राम गीधा, मुंगेली की निवासी हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना से मिलने वाले पैसों से गुपचुप ठेला व्यवसाय को बढ़ाया और अब घर की ज़िम्मेदारियाँ आसानी से निभा रही हैं। कुरूद ग्राम की निवासी श्यामा बाई जो कंडरा जनजाति से आती हैं और बांस शिल्प के पारंपरिक व्यवसाय से अब आजीविका चलाती हैं। योजना की सहायता अपने व्यवसाय को बढ़ाकर 8000 रुपए तक मासिक आमदनी अर्जित कर रही हैं।