प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेकर 1282 हितग्राहियों ने किया गोलमाल, किसी ने खरीदी बाइक तो किसी ने…

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प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेकर 1282 हितग्राहियों ने किया गोलमाल, किसी ने खरीदी बाइक तो किसी ने...

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  • Publish Date - October 30, 2020 / 06:32 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:14 PM IST

रायगढ़: शहर में आईएचडीपीसी के तहत गरीबों के लिए बनाए गए आवासों के आबंटन में गड़बड़ी का मामला सामने आऩे के बाद अब नगर निगम ने मामले की जांच शुरु कर दी है। निगम कमिश्नर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, जिसके बाद जांच के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है। कमेटी जांच के बाद पात्र हितग्राहियों को आवास आबंटन करेगी। दरअसल मामले को लेकर भाजपा ने विरोध दर्ज कराया था और अपात्रों को आवास आबंटन की पात्रता सूची में शामिल करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामले की जांच शुरु की गई है।

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रायगढ़ शहर में स्लम एरिया और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पक्के मकान देने के लिए आईएचडीपीसी के तहत फ्लैट्स बनाए गए थे। शहर की चार कालोनियों में ईडब्लूएस की जमीनों पर तकरीबन 12 सौ मकान बनाए गए थे। लेकिन नगर निगम की आबंटन सूची में चार सौ अधिक हितग्राही ऐसे पाए गए थे जिनके खुद के पास पक्के मकान हैं। इतना ही नहीं एक ही परिवार के तीन से चार सदस्यों को भी मकान आबंटित कर दिया गया था।

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मामला सामने आने के बाद भाजपा लगातार जांच की मांग कर रही थी, जिसके बाद कमिश्नर ने जांच टीम गठित की है। जांच टीम में ईई व नजूल अधिकारियों के साथ साथ राजस्व विभाग के कर्मचारी भी शामिल होंगे। नगर निगम का कहना है कि सूची की जांच की जाएगी। जांच के बाद पात्र हितग्राहियों को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। इधर भाजपा ने पूरी सूची निरस्त करने की मांग की है। भाजपा का कहना है कि आवास आबंटन की पूरी सूची ही गलत है। लिहाजा सूची को निरस्त कर नए सिरे से सर्वे की जानी चाहिए।

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भाजपा नेता आलोक सिंह ने मामले को लेकर कहा कि निगम में जब से सरकार आई है, तब से भ्रष्टाचार है। अटल आवास में ग़ड़बड़ी है, पूरी सर्वे सूची में गड़बडी है। एक भी हितग्राही नहीं है, जो पात्र है लेकिन सरकार ऐसे ही लोगों को आवास दे रही है। पूरी सूची निरस्त हो और सर्वे कर फिर से सूची बनाई जाए।

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वहीं, नगर निगम के सभापति जयंत ठेठवार ने कहा है कि जो आवास के लिए सर्वे किया गया था, वो कार्यालय में बैठकर सर्वे किया गया था। पात्र नहीं है, उनकी संख्या बहुत अधिक है। पात्र हितग्राहियों को दिए जाने का निर्णय़ लिया गया है। इसके लिए एक कमेटी बनाते हुए सर्वे सूची को तैयार कर राज्य शासन को भेजा जाएगा।

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