नमकीन-मीठा खाने से घाटी में बिगड़ रही बंदरों की सेहत, वन विभाग ने राहगीरों को खाद्य सामग्री नहीं देने की अपील की

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नमकीन-मीठा खाने से घाटी में बिगड़ रही बंदरों की सेहत, वन विभाग ने राहगीरों को खाद्य सामग्री नहीं देने की अपील की

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  • Publish Date - June 8, 2020 / 01:09 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:15 PM IST

केशकाल। पिछले कई सालों से केशकाल घाटी में रहने वाले बंदर दोपहर के समय अपना समय व्यतीत करने के लिए सड़कों के किनारे आकर बैठ जाते हैं, जिन्हें घाटी से आने जाने वाले लोग प्रतिदिन कुछ न कुछ खाने का देकर जाते हैं। लॉक डाउन के चलते घाट में वाहनों का आवागमन पर पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया था, घाट के बंदरों को खाने पीने की दिक्कत होती होगी। यह सोच कर केशकाल के स्थानीय लोग प्रतिदिन घाट के बंदरों के लिए कुछ न कुछ खाने पीने की सामग्री देने लगे थे।

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बस्तर की लाइफ लाइन व घुमावदार मोड़ों वाली केशकाल घाट सैकड़ों की संख्या में बंदर निवास करते है लगातार राष्ट्रीय राजमार्ग में चलने वाले राहगीरों के द्वारा दैनिक जीवन मे खाए जाने वाले खाने को बंदरों दे रहे हैं। जिससे अब लगातार बंदरों की तबियत बिगड़ने लगी है, जिसे ध्यान में रखते हुए केशकाल वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अब घाटी के कई मोड़ों पर एक बोर्ड लगवा कर उसमें बंदरों को किसी प्रकार की खाद्य सामग्री न देने हेतु निर्देश दिया है।

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केशकाल वनमण्डलाधिकारी मणिवासगन एस. ने बताया कि हमारे क्षेत्र में वनोपजों की अकूट सम्पदा है तथा वन्य जीव हर मौसम व परिस्थितियों में अपने भोजन की व्यवस्था स्वयं करने में सक्षम होते हैं। बीते दिनों स्थानीय लोगों के द्वारा तरह-तरह की खाद्य सामग्री खाने की वजह से उन बंदरों की तबियत में खराबी आने लगी है, जिसके लिए हमारे विभाग के द्वारा घाट में जगह जगह पर बोर्ड लगवाकर उसमें बंदरों को किसी प्रकार की खाद्य समग्री न देने हेतु सख्त हिदायत दिया गया है।

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