50 हजार जन्मों में एक को होने वाली दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे 10 माह के शिशु को मिला नया जीवन

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50 हजार जन्मों में एक को होने वाली दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे 10 माह के शिशु को मिला नया जीवन

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 09:57 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 09:57 PM IST

जयपुर, चार अगस्त (भाषा) जयपुर के ‘गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ के चिकित्सकों ने समय पर 10 माह के एक शिशु की जान बचाई है, जो ‘मिथाइलमैलोनिक एसिडीमिया’ जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा जन्मजात बीमारी से ग्रस्त था।

अस्पताल के अनुसार सफल उपचार के बाद शिशु की हालत सामान्य हो गई है और वह जल्द ही अस्पताल से घर लौटेगा।

चिकित्सकों के अनुसार शिशु को हर बार दूध पिलाने के बाद उल्टी होना, वजन नहीं बढ़ना, अत्यधिक सुस्ती और गंभीर कमजोरी की शिकायत थी तथा उसे गंभीर हालत में बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था।

चिकित्सकों का कहना है कि जांच के दौरान पता चला कि परिवार में पहले भी इसी तरह की बीमारी के कारण बच्चों की मौत हो चुकी थी, जिसके आधार पर उन्हें (चिकित्सकों को) दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी की आशंका हुई।

चिकित्सकों ने बताया कि भर्ती के समय शिशु ‘सेप्सिस’, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, श्वसन विफलता, उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर जटिलताओं से जूझ रहा था। विशेषज्ञ टीम ने आवश्यक दवाएं और विस्तृत जांच शुरू की। जांच में ‘मिथाइलमैलोनिक एसिडीमिया’ की पुष्टि हुई।

चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी लगभग 50 हजार जीवित जन्मों में एक बच्चे को होती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है।

चिकित्सकों का कहना है कि निदान के बाद शिशु को बीमारी के अनुरूप विशेष चिकित्सीय पोषण और आवश्यक उपचार दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार उपचार का सकारात्मक असर तेजी से दिखाई दिया और अब बच्चा सामान्य रूप से भोजन ले रहा है, उसका वजन बढ़ रहा है तथा उसकी स्थिति स्थिर है।

अस्पताल प्रशासन ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना तथा केंद्र सरकार की विशेष स्वास्थ्य योजना से जोड़कर बीमारी के लिए आवश्यक महंगा चिकित्सीय पोषण उपलब्ध कराया, जिससे इलाज में आर्थिक बाधा नहीं आई।

इस उपचार में डीन एवं प्राचार्य प्रो. डॉ. अशोक गुप्ता के मार्गदर्शन में बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में डॉ. रामकेश मीणा, डॉ.डी. हरिणी, डॉ.ईशा, डॉ. विष्णु, डॉ. मयंक, डॉ. कंगना तथा बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई के नर्सिग इंचार्ज मुकेश वर्मा एवं उनकी टीम शामिल रही।

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार