नयी दिल्ली: आंदोलन के 100 दिन पूरे होने के बीच किसान नेताओं ने शनिवार को कहा कि प्रदर्शनकारी संगठन तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अडिग हैं। साथ ही किसान नेताओं ने कहा कि वे सरकार के साथ वार्ता को तैयार हैं, लेकिन बातचीत बिना शर्त होनी चाहिए। इससे पहले दिन में हजारों किसानों ने हरियाणा के कुछ स्थानों पर कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे को अवरुद्ध किया। दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने के चलते किसानों ने रास्ता जाम करके अपना विरोध दर्ज कराया।
संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग पर अडिग हैं। पाल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ” हमारे आंदोलन की शुरुआत से ही मांग एक समान रही है कि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। हम सरकार से वार्ता बहाली के लिए तैयार हैं। हालांकि, ऐसा बिना किसी पूर्व शर्त के होना चाहिए।”
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सरकार ने जनवरी में विवादास्पद कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल के लिए स्थगित करने के साथ ही किसानों की समस्याओं का उचित समाधान करने के मद्देनजर संयुक्त समिति बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे किसान संगठनों ने नकार दिया था। वरिष्ठ किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि किसान संगठनों ने कभी भी केंद्र सरकार के साथ बातचीत से इंकार नहीं किया है। साथ ही कहा कि मांगों और वार्ता को लेकर उनका रुख शुरू से ही स्पष्ट है।
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संधू ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को तेज करने के संबंध में निर्णय लेने के लिए नौ मार्च को बैठक बुलाई है। उन्होंने दावा किया, ” हर दिन और अधिक लोग किसान आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। राजधानी की चार सीमाओं पर ही 1.25 लाख से अधिक लोग मौजूद हैं।” अन्य किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि किसान हमेशा सरकार के साथ वार्ता करने को तैयार हैं।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ” लोकतंत्र में किसी भी समस्या का हल बातचीत से ही निकलेगा। लेकिन, जो लोग सत्ता में हैं, उन्हें हमारे पास औपचारिक निमंत्रण भेजना चाहिए, जिस तरह पूर्व में हुई वार्ता के दौरान किया गया था। सरकार की तरफ से सशर्त बातचीत से समस्या का हल नहीं निकलेगा।” इससे पहले, किसानों ने आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर शनिवार को हरियाणा में छह लेन वाले कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे पर कुछ स्थानों पर यातायात अवरुद्ध कर दिया।
किसानों का प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ, जो अपराह्न चार बजे तक जारी रहा। काले झंडे थामे तथा बांह पर काली पट्टी बांधे किसानों और काला दुपट्टा पहने महिला प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें नहीं माने जाने को लेकर भाजपा नीत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सोनीपत तथा झज्जर और कुछ अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी अपने ट्रैक्टर ट्रॉली तथा अन्य वाहन लेकर आए और उन्हें केएमपी एक्स्प्रेसवे के कुछ हिस्सों में बीच में खड़ा कर दिया।