राज्यसभा में 19 विधेयक लंबित, सबसे पुराना 1992 का

राज्यसभा में 19 विधेयक लंबित, सबसे पुराना 1992 का

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  • Publish Date - January 17, 2026 / 06:24 PM IST,
    Updated On - January 17, 2026 / 06:24 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) राज्यसभा में कुल 19 सरकारी विधेयक लंबित हैं, जिनमें सबसे पुराना जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित है और यह 1992 का है।

राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता, और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं। लोकसभा में लंबित विधेयक सदन के भंग होने पर समाप्त हो जाते हैं, राज्यसभा में लंबित विधेयक कभी समाप्त नहीं होते।

संसद के उच्च सदन के बुलेटिन के अनुसार, वर्तमान में 19 विधेयक लंबित हैं, जिनमें सबसे पुराना ‘संविधान (79वां संशोधन) विधेयक, 1992’ है।

इस विधेयक में राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसके तहत राज्य को जनसंख्या नियंत्रण और छोटे परिवार मानदंड को बढ़ावा देना होगा और छोटे परिवार मानदंड को बढ़ावा देना एवं अपनाना मौलिक कर्तव्यों में शामिल किया जाएगा। इसमें यह भी प्रस्ताव है कि यदि किसी सांसद या विधायक के दो से अधिक बच्चे हैं तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

लंबित विधेयकों में दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक, 1997 भी शामिल है, जिसका उद्देश्य दिल्ली किराया अधिनियम, 1995 में संशोधन करना था। इसका लक्ष्य किराया नियंत्रण कानूनों का आधुनिकीकरण करना था, लेकिन इसे किरायेदार और मकान मालिक समूहों से बड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

सरकार जहां एक ओर बीज विधेयक 2025 लाने पर काम कर रही है, वहीं लंबित विधेयकों में बीज विधेयक, 2004 भी शामिल है, जिसका उद्देश्य बिक्री, आयात और निर्यात के लिए बीजों की गुणवत्ता को विनियमित करना और गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन एवं आपूर्ति को सुविधाजनक बनाना था।

अंतर-राज्यीय प्रवासी कामगार (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) संशोधन विधेयक, 2011 भी लंबित है, जिसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के श्रम मंत्री रहते हुए पेश किया गया था।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) दो के दौरान पेश किए गए अन्य लंबित विधेयकों में भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक संबंधी कानून (संशोधन) विधेयक, 2013; रोजगार एक्सचेंज (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) संशोधन विधेयक, 2013; और संसदीय एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व का पुनर्व्यवस्थापन (तीसरा) विधेयक, 2013 शामिल हैं।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासन के दौरान पेश लंबित विधेयकों में संविधान (एक सौ पच्चीसवां संशोधन) विधेयक, 2019 शामिल है, जिसका उद्देश्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में स्वायत्त परिषदों की वित्तीय और कार्यकारी शक्तियों को बढ़ाकर पूर्वोत्तर में आदिवासी स्वायत्तता को मजबूत करना, निर्वाचित ग्राम और नगर परिषदों की शुरुआत करना और अनिवासी भारतीय विवाह पंजीकरण विधेयक, 2019 शामिल है।

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 से लंबित है।

भाषा आशीष माधव

माधव