कोच्चि, छह अगस्त (भाषा) केरल की एक अदालत ने 2006 के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में चार लोगों को दोषी ठहराते हुए उन्हें दो-दो साल की जेल की सजा सुनाई, जबकि तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। इस मामले में सरकारी वन भूमि को फर्जी तरीके से गिरवी रखकर बैंक से ऋण हासिल किया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश सबरीनाथन पी. ने बुधवार को के. ए. सेबेस्टियन (68), पी. टी. ऑगस्टीन (63), जोबी चाको (56) और के. जयप्रकाश (51) को 2006 में स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) की अलुवा शाखा से 96.80 लाख रुपये का ऋण धोखाधड़ी से प्राप्त करने का दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने एसबीटी के पूर्व मुख्य प्रबंधक टी. चंद्रन, पूर्व प्रबंधक (कृषि) मणि टी. चेरियन और राजेश वी. बी. को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
एक अन्य आरोपी जॉनी चाको की मुकदमे के दौरान मौत हो जाने के कारण उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने मलप्पुरम जिले के करुवाराकुंडु गांव में स्थित पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील 34 एकड़ सरकारी वन भूमि से संबंधित फर्जी बिक्री विलेख (सेल डीड) तैयार किए और खुद को उसका मालिक बताकर स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर की अलुवा शाखा से 96.80 लाख रुपये का ऋण हासिल किया।
सीबीआई के अनुसार, जोबी चाको, जॉनी चाको और पी. टी. ऑगस्टीन ने फर्जी भूमिधारकों का रूप धारण कर के. जयप्रकाश के पक्ष में जाली बिक्री विलेख तैयार किए। इसके बाद ऋण की राशि हड़पने के लिए फर्जी बैंक खाते भी खोले गए।
अदालत ने सेबेस्टियन और जयप्रकाश को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के साधारण कारावास तथा 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
वहीं, ऑगस्टीन और जोबी चाको को जालसाजी, फर्जी पहचान अपनाने समेत अन्य आरोपों में दोषी ठहराया गया। उन्हें अधिकतम दो वर्ष तक के कारावास की सजा सुनायी गयी और प्रत्येक पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी