नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि नेटफ्लिक्स, गूगल, यूट्यूब और एअर इंडिया जैसी निजी संस्थाओं के साथ पर्यटन मंत्रालय की साझेदारी भारत के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकती है।’’
राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) में आयोजित एक कार्यक्रम को बुधवार को संबोधित करते हुए शेखावत ने कहा कि भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। इस कार्यक्रम में भारत में नेटफ्लिक्स के 10 वर्ष पूरे होने का भी जश्न मनाया गया।
उन्होंने बताया कि नेटफ्लिक्स ने अपनी विभिन्न फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए भारत के 100 से अधिक स्थानों का इस्तेमाल किया है।
पिछले वर्ष विश्व पर्यटन दिवस पर पर्यटन मंत्रालय ने ‘नेटफ्लिक्स एंटरटेनमेंट सर्विसेज इंडिया’ के साथ एक ‘‘गैर-व्यावसायिक’’ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य सिनेमाई कहानी कहने की कला के माध्यम से भारत के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है।
भारत दौरे पर आए नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सारंडोस ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में कहानी कहने की भूमिका पर चर्चा की।
संस्कृति और पर्यटन दोनों मंत्रालयों का जिम्मा संभाल रहे शेखावत ने कहा कि फिल्में, धारावाहिक और नेटफ्लिक्स जैसे मंच भारत की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि ऐसी साझेदारियां कमाल कर सकती हैं।’’
मंत्री ने कहा कि इस तरह की साझेदारियां न केवल दुनिया के सामने भारत को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करेंगी, बल्कि भारतीयों को भी देश के विविध क्षेत्रों की यात्रा के लिए प्रेरित करेंगी।’’
इस अवसर पर दोनों पक्षों के सहयोग से विकसित ‘इन्क्रेडिबल इंडिया’ पोर्टल पर ‘ऐज सीन ऑन नेटफ्लिक्स’ नामक एक नया अनुभाग भी शुरू किया गया।
मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर के दर्शकों को नेटफ्लिक्स इंडिया की फिल्मों और वेब सीरीज में दिखाए गए वास्तविक पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक परंपराओं और प्रामाणिक अनुभवों से परिचित कराना है।
शेखावत ने कहा, ‘‘नेटफ्लिक्स, इंडिगो, एअर इंडिया, यूट्यूब और गूगल जैसे तकनीकी मंचों के साथ हमने जो भी समझौते किए हैं, वे सभी गैर-व्यावसायिक हैं। इसके लिए हम उन्हें कोई भुगतान नहीं करते।’’
उन्होंने कहा कि भारत एक बहुत बड़ा बाजार है, इसलिए इन कंपनियों को यहां कई तरह के लाभ मिलते हैं।
भाषा गोला सुरभि
सुरभि