जुबिन गर्ग की पहली बरसी से एक दिन पहले उनके प्रशंसक बड़ी संख्या में स्मारक पहुंचे

जुबिन गर्ग की पहली बरसी से एक दिन पहले उनके प्रशंसक बड़ी संख्या में स्मारक पहुंचे

जुबिन गर्ग की पहली बरसी से एक दिन पहले उनके प्रशंसक बड़ी संख्या में स्मारक पहुंचे
Modified Date: September 18, 2026 / 04:00 pm IST
Published Date: September 18, 2026 4:00 pm IST

गुवाहाटी, 18 सितंबर (भाषा) गायक जुबिन गर्ग की पहली बरसी से एक दिन पहले, शुक्रवार को यहां कामरकुची स्थित स्मारक पर उनके प्रशंसक और चाहने वाले बड़ी संख्या में जमा हुए।

पिछले साल उनके अचानक निधन से लोगों को गहरा दुख हुआ था और पूरा असम शोक में डूब गया था।

गर्ग को अलग-अलग तरह से श्रद्धांजलि दी गई। लोगों ने उनके गाने गाए, चित्रकारों ने उनके चित्र बनाए और स्मारक पर तरह-तरह की चीजें अर्पित कीं।

गायक की पहली बरसी पर बृहस्पतिवार से उनकी समाधि स्थल पर ‘जुबिन दिवस’ नामक तीन-दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन राज्य के सांस्कृतिक विभाग, कलागुरु आर्टिस्ट फ़ाउंडेशन, जुबिन गर्ग फैन क्लब और अन्य संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग भी बृहस्पतिवार को शोक मनाने वालों में शामिल हुईं। इस दौरान ‘नाम-प्रसंग’ (प्रार्थना) समेत कई कार्यक्रम हुए और वहां मौजूद लोगों ने उनके लोकप्रिय गाने गाए।

दूसरे दिन भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों समेत कई आयोजन किए जा रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए शामिल हो रहे हैं।

कलाकार अंतिम संस्कार स्थल पर जमा हुए और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए गर्ग के चित्र बनाए।

पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में प्रस्तुति देने से एक दिन पहले, लैज़रस आइलैंड पर तैरते समय गर्ग डूब गए थे।

असम पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस मौत की जांच की और दिसंबर में यहां एक अदालत में सात आरोपियों को नामजद करते हुए आरोप-पत्र दाखिल किया। ​​उनमें से चार पर हत्या के आरोप हैं।

यहां एक खास त्वरित सत्र अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने नवंबर में विधानसभा में कहा था कि गर्ग की मौत ‘साफ-साफ हत्या’ का मामला है।

हालांकि अलग से जांच करने वाली सिंगापुर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि किसी साजिश का कोई सबूत नहीं है।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में