मध्यप्रदेश के कान्हा में ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ संक्रमण से बाघ की मौत, एक माह में ऐसी छठी मौत
मध्यप्रदेश के कान्हा में ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ संक्रमण से बाघ की मौत, एक माह में ऐसी छठी मौत
मंडला (मध्यप्रदेश), 19 मई (भाषा) मध्यप्रदेश के कान्हा बाघ अभयारण्य (केटीआर) के कोर क्षेत्र में फेफड़ों में संक्रमण के कारण मंगलवार को एक बाघ की मौत हो गई, जिससे एक महीने के भीतर ऐसे संक्रमण से बाघों की मौत की संख्या छह हो गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों को संदेह है कि मौतें ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी)’ से जुड़ी हो सकती हैं, जो आमतौर पर आवारा कुत्तों में पाया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि बाघ मुक्की रेंज के तहत मोहगांव बीट में मृत पाया गया।
केटीआर के उप निदेशक पी के वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल के अनुसार शव की जांच की गई।
उन्होंने कहा, ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि मरा हुआ बाघ करीब पांच से छह साल का नर था। उसके फेफड़ों में गंभीर संक्रमण पाया गया है।’
उन्होंने बताया कि बाघ के दांत, पंजे और मूंछों सहित शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए।
उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों ने विसरा और फोरेंसिक नमूने एकत्र किए तथा बाद में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शव का निस्तारण किया।
केटीआर के वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि आवारा कुत्ते कभी-कभी वन क्षेत्रों में घुसकर शाकाहारी जंगली जानवरों पर हमला करते हैं।
उन्होंने कहा,‘‘अगर कोई संक्रमित शाकाहारी बच जाता है और बाद में बाघ उसका शिकार करता है तो बाघ ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ से संक्रमित हो सकता है।’’
अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल में बाघिन अमाही और उसके चार शावकों की फेफड़ों में संक्रमण के बाद कान्हा के सरही रेंज में नौ दिनों के भीतर मौत हो गई थी।
वन अधिकारियों के अनुसार, 21 अप्रैल को सरही रेंज में अमाही नाले के पास एक शावक की मौत हो गई, इसके बाद 23 अप्रैल को एक नर शावक और 25 अप्रैल को एक मादा शावक की मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि बाघिन और एक अन्य शावक को 26 अप्रैल को बचाया गया था और उन्हें मुक्की रेंज के एक पृथक-वास केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन 29 अप्रैल को दोनों की मौत हो गई।
भाषा सं ब्रजेन्द्र राजकुमार
राजकुमार

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