आम आदमी पार्टी के सदस्य ने रास में की रेलवे को एक स्वतंत्र इकाई बनाने की मांग

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आम आदमी पार्टी के सदस्य ने रास में की रेलवे को एक स्वतंत्र इकाई बनाने की मांग

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 02:59 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 02:59 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) रेलवे टिकट ‘कन्फर्म’ नहीं हो पाने की समस्या उठाते हुए राज्यसभा में सोमवार को आम आदमी पार्टी सदस्य संदीप पाठक ने कहा कि रेलवे को लेकर आम लोगों की समस्याओं का कारण कहीं न कहीं अवसंरचना में कमी है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि रेलवे को एक स्वतंत्र निकाय बनाना चाहिए ताकि परिवहन के इस महत्वपूर्ण संसाधन की समस्याएं भी हल हों और लोगों को यात्रा में सुविधा भी मिल सके।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए पाठक ने कहा कि रेलवे में टिकट न तो तुरंत मिल पाता है और न ही समय पर कन्फर्म हो पाता है। ‘‘प्रतीक्षा सूची में 25 फीसदी की सीमा तय की जा चुकी है। देश में 15 लाख के करीब टिकट बुक होती हैं जिनमें से करीब दो लाख टिकट कन्फर्म नहीं हो पाते। इसका कारण कहीं न कहीं अवसंरचना की कमी है।’’

उन्होंने कहा कि साल 1950 में देश की आबादी करीब 36 करोड़ थी और तब हमारा रेलवे ट्रैक 53,600 किलोमीटर लंबा था। आज आबादी 140 करोड़ पहुंच गई है और रेलवे ट्रैक केवल 69,000 किलोमीटर हुआ है।

उन्होंने कहा ‘‘साफ है कि हम विकास नहीं कर पाए। हमें एक लाख बीस हजार किलोमीटर लंबा ट्रैक चाहिए। हमारी फिलहाल जो रफ्तार है उसमें हमें एक लाख बीस हजार किलोमीटर लंबा ट्रैक पाने में बीस साल लगेंगे। हमारी कोचों की संख्या 84 हजार है और हमें एक लाख बीस हजार से अधिक कोच चाहिए। हमारी वर्तमान रफ्तार रही तो हमें एक लाख बीस हजार से अधिक कोच के लिए पांच साल और चाहिए।’’

पाठक ने कहा कि सुरक्षा उपकरण भी जरूरी है और हमारी रफ्तार देख कर लगता है कि ‘‘हमें कवच को हासिल करने के लिए कई साल, करीब 200 साल लग जाएंगे। साफ है कि अवसंरचना में पैसा नहीं लगाया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि हम हर बार वंदे भारत और बुलेट ट्रेन की बात करते हैं और ध्यान मूल समस्या से भटक जाता है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत और बुलेट ट्रेन समानांतर चलना चाहिए। ‘‘लेकिन मूल जरूरत पूरी होनी चाहिए। अगर कोई आदमी कहीं जाना चाहता है तो उसे टिकट मिलना चाहिए।’’

पाठक ने कहा कि रेलवे को एक स्वतंत्र इकाई बनाया जाना चाहिए ताकि इन समस्याओं का समाधान निकल सके और लोगों को यात्रा में सुविधा भी मिल सके।

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश

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