बिरला से मिले अभिषेक बनर्जी, बागियों के मामले में जल्द फैसले का आग्रह किया

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बिरला से मिले अभिषेक बनर्जी, बागियों के मामले में जल्द फैसले का आग्रह किया

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  • Publish Date - July 27, 2026 / 07:17 PM IST,
    Updated On - July 27, 2026 / 07:17 PM IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने संबंधी लंबित याचिकाओं पर जल्द फैसला करें तथा पार्टी के सांसदों की बैठने की व्यवस्था में किए गए बदलावों को रद्द करें।

सूत्रों ने बताया कि बनर्जी ने पूर्वाह्न करीब 11.15 बजे अध्यक्ष के कक्ष में बिरला से मुलाकात की और उन्हें दो पत्र सौंपे। यह बैठक करीब 20 मिनट चली।

उन्होंने कहा कि बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर अध्यक्ष की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

बनर्जी ने अपने पहले पत्र में कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची और लोकसभा सदस्य (दलबदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985 के तहत 19 जून को दायर की गईं 20 याचिकाएं पांच सप्ताह से अधिक समय से लंबित हैं और अब तक न तो नोटिस जारी किए गए हैं, न सुनवाई तय की गई है और न ही कोई प्रक्रियागत निर्देश जारी किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘याचिकाएं दायर किए जाने के बाद पांच सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। आज तक कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है, कोई सुनवाई निर्धारित नहीं की गई है और ऐसा प्रतीत होता है कि कोई प्रक्रियागत निर्देश भी पारित नहीं किया गया है। इस तरह की लगातार निष्क्रियता गंभीर चिंता का विषय है।’’

बनर्जी ने कहा कि ये याचिकाएं तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित 20 सांसदों से संबंधित हैं, जिन्होंने ‘‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ खुद को जोड़ लिया है, जो संसद या किसी राज्य विधानसभा में प्रतिनिधित्व के बिना एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक संगठन है।’’

उन्होंने कहा कि अयोग्यता की कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक लंबित रखने से 10वीं अनुसूची का संवैधानिक उद्देश्य विफल होता है, संविधान जिस अनिश्चितता को दूर करना चाहता है, वह बनी रहती है और दलबदल रोधी कानून में निहित सुरक्षा उपायों के अप्रभावी होने का खतरा पैदा होता है।

बनर्जी ने कहा कि 19 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा अयोग्यता याचिकाओं का सामना कर रहे सांसदों को अलग समूह के रूप में सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किए जाने के बाद इस मामले में तात्कालिकता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि उनकी स्थिति को लेकर जारी अनिश्चितता दसवीं अनुसूची और संसदीय कार्यवाही की गरिमा, दोनों को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने दूसरे पत्र में लोकसभा सचिवालय द्वारा 18 जुलाई को जारी उस परिपत्र पर आपत्ति जताई, जिसमें तृणमूल के 28 सांसदों के मत विभाजन और सीट संख्या में बदलाव किया गया था।

उन्होंने कहा कि उसी दिन जारी एक अन्य परिपत्र में तृणमूल को 28 सांसदों वाली एकल संसदीय पार्टी के रूप में मान्यता दी गई है और उन्हें उसका नेता बताया गया है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आपके कार्यालय द्वारा एआईटीसी को 28 सांसदों के एकल समूह के रूप में मान्यता दी गई है।’’

उन्होंने दलील दी कि अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला किए जाने से पहले बागी समूह के एकतरफा अनुरोध के आधार पर बैठने और मतविभाजन संख्या में बदलाव करना अनुचित है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘इन सांसदों की अयोग्यता और उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में आपके फैसले के लंबित रहने के दौरान, एनसीपीआई के साथ उनका विलय नहीं हुआ है। ऐसे में केवल बागी समूह के एकतरफा अनुरोध के आधार पर हमारे सांसदों की बैठने और डिविजन व्यवस्था में बदलाव करना स्पष्ट रूप से अन्यायपूर्ण और स्थापित संसदीय परंपरा के विपरीत है।’’

उन्होंने कहा कि इस बदलाव से उनके समेत शेष आठ सांसदों को अनुचित नुकसान हुआ है, जबकि मामला अभी अध्यक्ष के विचाराधीन है।

बनर्जी ने 19 जून को अध्यक्ष के समक्ष 20 याचिकाएं दायर कर एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा करने वाले बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी।

मानसून सत्र से पहले बागी सांसदों ने बिरला से मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था, एनसीपीआई संसदीय समूह की मान्यता और सुदीप बंद्योपाध्याय को उसके सदन में नेता तथा काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक बनाए जाने पर चर्चा की थी।

इसके बाद 19 जुलाई को एनसीपीआई को सर्वदलीय बैठक में अलग से आमंत्रित किया गया था, जिसके विरोध में विपक्षी दलों ने सांकेतिक रूप से बैठक से बहिर्गमन किया था।

भाषा हक हक नेत्रपाल

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