अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसले के लिए न्यायालय का रुख किया

अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसले के लिए न्यायालय का रुख किया

अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसले के लिए न्यायालय का रुख किया
Modified Date: August 24, 2026 / 07:21 pm IST
Published Date: August 24, 2026 7:21 pm IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों के मामले में उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने एनसीपीआई में शामिल होने वाले पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने के अनुरोध वाली याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जल्द फैसला लेने के लिए निर्देश का आग्रह किया है।

उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की है।

शीर्ष अदालत में ऐसी ही एक याचिका शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की भी लंबित है, जिसमें उसके छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी दिए जाने को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है।

बनर्जी ने अपनी याचिका में सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में कथित देरी को चुनौती दी है।

तृणमूल नेता ने लोकसभा अध्यक्ष को संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए निर्देश का अनुरोध किया है। उन्होंने इससे पहले 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं और बाद में लोकसभा अध्यक्ष से इनका जल्द निपटारा करने का अनुरोध किया था।

खबरों के मुताबिक, इस मुद्दे पर बनर्जी ने 27 जुलाई को लिखित रूप से याद दिलाने के बाद 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात भी की थी।

यह विवाद तृणमूल के संसदीय दल में हुई बगावत के बाद सामने आया है। तृणमूल के 20 लोकसभा सांसदों ने घोषणा की थी कि वे त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं या उसके साथ विलय कर लिया है। साथ ही उन्होंने लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया था।

तृणमूल का कहना है कि इन सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता था और किसी अन्य राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका फैसला पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के समान है। ऐसे में दलबदल विरोधी कानून के तहत वे अयोग्य ठहराए जा सकते हैं।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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