नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस पर हस्ताक्षर करने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन यह कदम उठाने से पहले विपक्षी दलों को लोकसभा अध्यक्ष के सामने अपनी शिकायतें रखनी चाहिए थी।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर से लोकसभा सदस्य बनर्जी ने कहा कि विपक्ष द्वारा बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने से पहले उन्हें एक मौका दिया जाना चाहिए था।
विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा और बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने तथा अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह नोटिस सौंपा।
नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
बनर्जी ने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस को लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर हस्ताक्षर करने में कोई दिक्कत नहीं है। हमारे सभी 28 सांसद इस पर हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले हम चाहते हैं कि ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दल लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखें, जिसमें उन चार मुद्दों का उल्लेख किया जाए जिन्हें लेकर उन्हें आपत्ति है।’’
उनका कहना था, ‘‘मिसाल के तौर पर आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया है। इस निलंबन पर पुनर्विचार या इसे रद्द करने की अपील की जा सकती है। अध्यक्ष को दो से तीन दिन का समय दिया जाना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अध्यक्ष कार्रवाई नहीं करते या चारों मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं देते, तो तीन दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है।
तृणमूल नेता ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि लोकसभा सुचारू रूप से चले।
बनर्जी ने आज कार्यवाही स्थगित होने का उल्लेख करते हुए यह भी कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सदन सही तरीके से चले, लेकिन लगता है कि केंद्र सरकार ऐसा नहीं चाहती। सदन आज दो बार स्थगित किया जा चुका है और अध्यक्ष सदन में नहीं आए।’’
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