केवाईसी दस्तावेज जमा कराने के बाद अभिषेक का बैंक खाता फिर से चालू
केवाईसी दस्तावेज जमा कराने के बाद अभिषेक का बैंक खाता फिर से चालू
कोलकाता, 24 अगस्त (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) से जुड़े दस्तावेज निजी बैंक में जमा कराए जाने के बाद उनका बैंक खाता और डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड फिर से चालू होने का संज्ञान लेते हुए सांसद की याचिका का सोमवार को निपटारा कर दिया।
बनर्जी के वकील अयन भट्टाचार्य ने दावा किया था कि 10 अगस्त को उनके बैंक खाते में लेन-देन पर रोक (फ्रीज) लगा दी गई थी और उनके डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड ‘ब्लॉक’ (बाधित) कर दिए गए थे। उसी दिन उच्चतम न्यायालय ने उन्हें चिकित्सकीय कारणों से विदेश यात्रा की अनुमति दी थी।
उन्होंने अदालत को बताया कि डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी की इस सप्ताह विदेश जाने की योजना है।
बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने मौखिक टिप्पणी की कि किसी भी ग्राहक के मामले में बैंक को केवाईसी अद्यतन करने के लिए आवश्यक जानकारी मांगते हुए पहले नोटिस देना चाहिए और शुरुआत में ही उसके डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड ‘ब्लॉक’ नहीं किए जाने चाहिए।
बनर्जी द्वारा अपने आवास पर बैंक के एक अधिकारी को सभी दस्तावेज सौंपे जाने के बाद न्यायमूर्ति राव ने याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत ने बैंक की इस दलील का संज्ञान लिया कि केवाईसी दस्तावेज जमा किए जाने के बाद बनर्जी का खाता तथा उनके डेबिट और क्रेडिट कार्ड फिर से सक्रिय कर दिए गए हैं।
बहस के दौरान अदालत ने कहा कि यदि ग्राहक आवश्यक जानकारी देने से बचता है तो बैंक यह कह सकता है कि उसके पास कार्ड ‘ब्लॉक’ करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
बैंक की वकील ने कहा कि केवाईसी दस्तावेज मांगने के लिए ग्राहकों को ऐसे नोटिस दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि तीसरे पक्ष से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर बैंक की केंद्रीय टीम ने बनर्जी के खाते पर प्रतिबंध लगाया और ग्राहक को इस संबंध में ईमेल भेजा गया।
वकील ने कहा कि अधिक जोखिम वाली श्रेणी में आने के कारण खाता स्वत: ‘ब्लॉक’ हो गया था।
बैंक की वकील ने 20 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि बनर्जी का नाम, स्थायी खाता संख्या (पैन) और मोबाइल नंबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शुरू किए गए मामलों से जुड़े हैं।
भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार, बार-बार याद दिलाए जाने के बावजूद संबंधित ग्राहक द्वारा आवश्यक केवाईसी जानकारी नहीं देने पर ही बैंक चरणबद्ध तरीके से खाते को आंशिक रूप से ‘फ्रीज’ कर सकता है।
बैंक की वकील ने कहा कि बैंक ने आरबीआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं किया और उसका ग्राहक को परेशान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि बैंक ने बनर्जी से केवल अतिरिक्त केवाईसी जानकारी मांगी थी।
भाषा
सिम्मी नरेश
नरेश

Facebook


