चंडीगढ़, 26 अप्रैल (भाषा) हरियाणा में गुरुग्राम के एक फ्लैट से मधुमेह और वजन घटाने वाली दवा ‘मौनजारो’ (तिरजेपैटाइड) के नकली इंजेक्शन बनाने वाले आरोपी ने ‘टोनअप’ ब्रांड नाम से भी एक फर्जी इंजेक्शन तैयार किया था। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
मामले के मुख्य आरोपी अवि शर्मा (32) ने दिल्ली के प्रसिद्ध थोक दवा बाजार भागीरथ पैलेस में कुछ लोगों को अपना उत्पाद बेचने की कोशिश की थी, लेकिन वहां किसी ने भी उससे दवा नहीं खरीदी।
शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
नकली ‘मौनजारो’ इंजेक्शन की पैकेजिंग में रंग की भिन्नता और लिखावट की गलतियों के कारण यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। गुरुग्राम औषधि नियंत्रण कार्यालय ने हाल ही में एक फ्लैट से संचालित किए जा रहे इस अवैध निर्माण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई की थी।
औषधि नियंत्रण अधिकारी अमनदीप चौहान के अनुसार, शर्मा लोकप्रिय ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘अलीबाबा’ के जरिये चीन से कच्चा माल मंगवाता था।
चौहान ने बताया, ‘‘शर्मा ने ‘टोनअप’ नाम से एक नमूना विकसित किया था, जिसे भारत या हरियाणा सरकार से कोई मंजूरी नहीं मिली थी। हमने परामर्श जारी किया है कि टोनअप ब्रांड के तहत तिरजेपैटाइड इंजेक्शन का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह सुरक्षित नहीं है।’
अधिकारी ने बताया कि ऐसा लगता है कि यह उत्पाद अभी बड़े पैमाने पर नहीं बंटा है और केवल कुछ ही इंजेक्शन बेचे गए थे। विभाग ने ‘इंडियामार्ट’ से भी विवरण मांगा है, जहां शर्मा ने कथित तौर पर अपने उत्पादों को सूचीबद्ध किया था।
चौहान ने कहा कि शर्मा को इंडियामार्ट के जरिये कुछ संभावित ग्राहक मिले थे। विभाग ने वहां से उत्पाद वापस मंगा लिये हैं और अब तक 20 इंजेक्शन वापस मिल चुके हैं।
हैदराबाद भेजे गए छह इंजेक्शन का भी पता लगा लिया गया है और उन्हें जब्त करने के लिए वहां के अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।
अधिकारी ने बताया कि हाल ही में शर्मा के पास से 262 नकली मौनजारो इंजेक्शन बरामद किए गए थे।
उन्होंने बताया कि आरोपी ने एक फार्मेसी से पर्चे पर दो असली मौनजारो इंजेक्शन खरीदे थे, जिसके बाद उसने बाहरी डिब्बे और लेबल सहित पूरी पैकेजिंग की नकल तैयार की। जिस व्यक्ति को आरोपी के लिए डिब्बे और लेबल बनाना था, उसे अब इस मामले में गवाह बनाया गया है।
गुरुग्राम निवासी उस व्यक्ति ने बताया कि शर्मा ने उसे झांसा दिया था कि उसकी अपनी दवा इकाई है।
चौहान ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले शर्मा भागीरथ पैलेस में कुछ लोगों से मिला था, लेकिन वह कुछ बेच नहीं पाया और उसने केवल कीमतों की जानकारी दी थी।
जांच के दौरान पुलिस ने उन लोगों से भी मुलाकात की है और उन्हें गवाह बनाया गया है।
इससे पहले 18 अप्रैल को अधिकारियों ने गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-4 में एक वाहन से 70 लाख रुपये मूल्य के नकली मौनजारो इंजेक्शन जब्त किए थे।
चौहान ने बताया कि जब नकली नमूने की तुलना असली से की गई, तो पाया गया कि नकली इंजेक्शन के डिब्बों पर नीले और लाल रंग थे। इसके अलावा, इसके नकली संस्करण में लिखावट की कई गंभीर गलतियां भी थीं।
जांच के दौरान औषधि नियंत्रण कार्यालय के दल ने गुरुग्राम के सेक्टर-62 स्थित एक फ्लैट पर छापा मारा, जहां कथित तौर पर कच्चे माल में पानी मिलाकर इंजेक्शन तैयार किए जा रहे थे।
इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले डीएलएफ फेज-4 से एक डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद मुख्य आरोपी अवि शर्मा को हिरासत में लिया गया।
भाषा सुमित सुरेश
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