नैनीताल, 29 अप्रैल (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों से संयुक्त एवं सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
यहां डॉ. रघुनंदन सिंह टोलिया प्रशासनिक अकादमी में वन पंचायत प्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायतों और स्थानीय शहरी निकायों के निर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधन पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के आधार हैं, जिनके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने सरकारी संस्थानों, पंचायती राज संस्थाओं, नगरीय निकायों, वन पंचायतों और आम नागरिकों सहित सभी हितधारकों से जनभागीदारी बढ़ाने, पर्यावरण अनुकूल आजीविका के अवसर विकसित करने तथा संतुलित एवं सतत विकास सुनिश्चित करने की अपील की।
बिरला ने कहा कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का सम्मान करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के पास व्यावहारिक और अनुभवजन्य ज्ञान का भंडार है, जो वनाग्नि जैसी चुनौतियों से निपटने तथा वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने वन पंचायतों को “भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे सशक्त कड़ी” बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर की ये संस्थाएं संरक्षण और सुशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने उत्तराखंड की वन पंचायतों की सराहना करते हुए कहा कि ये न केवल वन संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान दे रही हैं, बल्कि रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ा रही हैं।
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दीप्ति रवि कांत